बाइडेन के शपथ समारोह में शामिल नहीं हुए, फिर भी जाते-जाते यह खास परंपरा निभा गए डोनाल्ड ट्रंप

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डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस को अलविदा कह दिया और इसके साथ ही अमेरिका के इतिहास में उनके कार्यकाल की एक ऐसी दागदार विरासत अंकित हो गई जैसी पहले कभी नहीं देखी गई। हालांकि, शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जाते-जाते एक परंपरा का निर्वहन किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उत्तराधिकारी जो बाइडन के लिए व्हाइट हाउस में एक संदेश छोड़ा है।

अमेरिकी परंपरा के तहत निवर्तमान राष्ट्रपति व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में रखे ‘रेजेल्यूट डेस्क में अगले राष्ट्रपति के लिए एक संदेश लिखकर रखता है। सीएनएन की खबर के अनुसार, परंपरा का पालन करते हुए ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बाइडन के लिए एक पत्र (नोट) लिखा है। सामान्य तौर पर निवर्तमान राष्ट्रपति के संदेश में बधाई और शुभकामनाएं होती हैं।

 

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने सामान्य और शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण की अन्य सभी परंपराओं को दरकिनार कर दिया। उन्होंने अमेरिकी संसद भवन (यूएस कैपिटल) में बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह में भाग नहीं लिया और समारोह से महज कुछ ही घंटे पहले देश की प्रथम महिला मेलेनिया ट्रंप के साथ फ्लोरिडा रवाना हो गए।

दरअसल, ट्रंप को उनकी अप्रत्याशित नेतृत्व क्षमता, समर्थकों और विरोधियों को समान रूप से लक्षित कर दिए गए विभाजनकारी बयानों के लिए और एक ऐसे राष्ट्रपति के रूप में जाना जाएगा जिन पर दो बार महाभियोग चलाया गया।  रियल एस्टेट कारोबारी से नेता बने 74 वर्षीय ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी में सत्ता के गलियारों में राजनीति के नियमों में बड़े फेरबदल किए।

पिछले चार वर्षों में उनके ऊपर दो बार महाभियोग चलाया गया और कार्यकाल समाप्त होने के कुछ दिन पहले ही अमेरिकी संसद पर समर्थकों द्वारा हिंसा भड़काने के आरोप में उन्हें दूसरी बार महाभियोग झेलना पड़ा।  कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कालखंड में हुए चुनाव में ट्रंप को अपने डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी लेकिन उन्होंने कभी इसे स्वीकार नहीं किया। इसकी बजाय उन्होंने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया जिसे देश के प्रशासन और ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के अधिकारियों ने भी खारिज कर दिया।

अमेरिका के इतिहास में ट्रंप तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन पर प्रतिनिधि सभा में महाभियोग चलाया गया और वह एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन पर दो बार महाभियोग चलाया गया। उन पर कोविड-19 महामारी के कुप्रबंधन का भी आरोप लगाया गया।

 

 

 

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