Shivraj Cabinet: छोटे-मझोले किसानों को गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिये कर्ज और ब्याज से मिलेगी मुक्ति

भोपाल । मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित-जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिये कर्ज और ब्याज से मुक्ति देने के बाद अब इसका दायरा बढ़ाने जा रही है।

मंंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की बैठक में मध्य प्रदेश ग्रामीण (सीमांत व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक) ऋण विमुक्ति विधेयक के मसौदे पर विचार कर राष्ट्रपति को अनुमति के लिए भेजने का निर्णय लिया जाएगा।

इसमें 15 अगस्त 2020 तक भूमिहीन कृषि श्रमिक, सीमांत और छोटे किसानों द्वारा गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिया गया कर्ज और ब्याज गैर कानूनी घोषित हो जाएगा। न तो किसान को यह राशि चुकानी होगी, न ही इसकी वसूली की जा सकेगी।

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बैठक में लगभग 15 मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इसमें छोटे और मझोले किसान सहित भूमिहीन कृषि श्रमिकों को गैर लाइसेंसी साहूकारों ने जो ऋण दिया है, उसकी वसूली को गैर कानूनी घोषित किया जाएगा। इसके लिए विधानसभा में राजस्व विभाग विधेयक प्रस्तुत करेगा। अधिनियम के दायरे में किराए पर दी गई संपत्ति, मजदूरी, भरण पोषण संबंधी दायित्व, लाइसेंस प्राप्त साहूकार या अन्य वित्तीय माध्यम से प्राप्त ऋण नहीं आएंगे। सिविल न्यायालय में गैर अधिनियम के दायरे में आने वाले प्रकरण की सुनवाई नहीं होगी।

ऋण वसूली के लिए राजस्व प्रक्रिया के तहत चल रही कार्रवाई भी समाप्त हो जाएगी। बंधक संपत्ति को भी मुुक्त करना होगा। अधिनियम का उल्लंघन करने पर तीन साल का कारावास या एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता के अलावा सिविल न्यायालय की अधिकारिकता को प्रभावित करने वाला विधेयक होने की वजह से राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति ली जाएगी।

बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सिंगरौली में बतौर पायलट प्रोजेक्ट फोर्टीफाइड चावल देने की योजना शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने सिंगरौली का चयन किया है।

इसमें फोर्टीफाइड चावल (आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 मिलाकर) एक रुपये प्रति किलो के हिसाब से 2.11 लाख परिवार के 11 लाख से ज्यादा सदस्यों को दिया जाएगा।

योजना में खर्च होने वाली राशि में 75 फीसद हिस्सा (प्रति किलो करीब 73 पैसे) केंद्र सरकार देगी और 25 प्रतिशत राज्य सरकार को देना होगा। बैठक में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्न्यन योजना को लागू करने संबंधी निर्णय लिया जाएगा। इसमें राज्य को चालीस फीसद राशि लगानी होगी। इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का प्रविधान किया जा रहा है। संविदा नियुक्ति देने के साथ पेंशन रोकने और अस्थायी पदों की निरंतरता संबंधी प्रस्तावों पर भी मंत्रिपरिषद निर्णय लेगी।