220 सालों में कई खूनी हिंसा की गवाह रही अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग, मगर ऐसा बवाल पहली बार हुआ, जानें क्या है विवाद

अमेरिका में कैपिटल परिसर के बाहर निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद परिसर को लॉक्ड डाउन (प्रवेश एवं निकास बंद) कर दिया गया। यहां जानें इतिहास में पहेल कब कैपिटल परिसार में हुए हैं हमले-

अमेरिकी कैपटोल परिसर में हमला का इतिहास

220 सालों में ऐसा पहली बार देखा गया, जब हिंसक भीड़ ने हमलावर का रूप ले लिया। इससे पहले अमेरिकी कैपिटल में और भी कई हिंसक झड़के देखी है।इससे खतरनाक हमले भी देखे हैं, लेकिन ऐसा कुछ पहली बार ही देखा जा रहा है। वो भी इतने बड़े शक्तिशाली लोकतंत्र में। पहले हुए हमलों की बात करें तो साल बाद1812 के युद्ध में ब्रिटिश सेना ने इसे जलाने की कोशिश की थी। जिसमें आक्रमणकारियों ने पहले इस इमारत को लूटा, और फिर दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में आघ लगा दी और बाद में कांग्रेस की लाइब्रेरी को अस्त-व्यस्त कर दिया।

वास्तुविद बेंजामिन हेनरी के अनुसार अचानक आए आंधी तूफान ने इसके विनाश को रोक दिया था, लेकिन इसके बाद इमारत बस एक “सबसे शानदार खंडहर” बन गई थी। सदन के “संघ, न्याय, सहिष्णुता, स्वतंत्रता, शांति जैसी बातों का मजाक बना दिया गया। इमारत पर कई बार बमबारी की जा चुकी है। गोलीकांड हुए हैं। एक बार तो एक नेता ने दूसरे को लगभग मार भी डाला है।

सबसे प्रसिद्ध वाकया 1950 में हुआ था, जब चार प्यूर्टो रिकान राष्ट्रवादियों ने द्वीप के झंडे को उखाड़ फेंका और “फ्रीडम फॉर प्यूर्टो रिको” चिल्लाते हुए सदन की विजिटर गैलरी से लगभग 30 गोलिया चलाईं। जिसमें पांच कांग्रेसी घायल हो गए, जिनमें से एक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

नेता लोलिता लेब्रोन को जब गिरफ्तार किया गया तो रोते हुए उन्होंने कहा, “मैं किसी को मारने नहीं आया, मैं प्यूर्टो रिको के लिए मरने आया था!” तब से ये सदन कई लोगों का टारगेट रहा है। 1915 में, एक जर्मन व्यक्ति ने सीनेट के स्वागत कक्ष में डायनामाइट की तीन छड़ें लगाई। आधी रात को जब कोई आस-पास नहीं था।
बमबारी करने वाला व्यक्ति जो पहले अपनी गर्भवति पत्नी का कत्ल कर चुका था, वह फाइनेंसर जे.पी. मॉर्गन जूनियर पर गोली चलाने वाला था, लेकिन गिरफ्तारी से पहले उसने खुद को मार डाला।

इसके अलावा 1971 में लाओस पर अमेरिकी बमबारी का विरोध करने के लिए एक विस्फोटक स्थापित किया, और 19 मई को कम्युनिस्ट आंदोलन ने ग्रेनाडा के आक्रमण के जवाब में 1983 में सीनेट पर बमबारी की। न तो कोई मौत हुई और न ही कोई घायल हुआ, लेकिन दोनों के परिणामस्वरूप हजारों-हजारों डॉलर का नुकसान हुआ और सुरक्षा के कड़े कदम उठाने पड़े।

कैपिटल पर सबसे घातक हमला 1998 में हुआ, जब एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ने एक चौकी पर गोलीबारी की और दो कैपिटल पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी। बाद में हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा भी कई हमले हुए 1835 में, एक विक्षिप्त घर के चित्रकार ने इमारत के बाहर राष्ट्रपति एंड्रयू जैक्सन पर दो पिस्तौल से गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

क्यो मचा है बवाल?

अमेरिका में ट्रंप समर्थकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, इन सब में एक महिला की जान भी चली गई। संसद के इस सत्र में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की जीत को प्रमाणित किया जाना था लेकिन ट्रंप अपनी बात पर अड़े हैं कि चुनावों में धांधली हुई है और वो लगातार अपने जीतने का दावा भी कर रहे हैं।

हिंसा शुरू होने के बाद कैपिटल के भीतर यह घोषणा की गई कि ”बाहरी सुरक्षा खतरे के कारण कोई व्यक्ति कैपिटल परिसर से बाहर या उसके भीतर नहीं जा सकता। जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की जीत को प्रमाणित करने के लिए सांसद संसद के संयुक्त सत्र के लिए कैपिटल के भीतर बैठे थे, तभी यूएस (अमेरिका) कैपिटल पुलिस ने इसके भीतर सुरक्षा के उल्लंघन की घोषणा की। कैपिटल के बाहर पुलिस और ट्रंप समर्थकों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने कैपिटल की सीढ़ियों के नीचे लगे अवरोधक तोड़ दिए।

कैपिटल पुलिस ने बताया कि इलाके में एक संदिग्ध पैकेट भी मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद का संयुक्त सत्र शुरू होने से ठीक पहले कहा कि वह चुनाव में हार को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें धांधली हुई है और यह धांधली उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन के लिए की गई, जो नवनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं।