कांग्रेस अध्यक्ष बनने से हिचक रहे हैं राहुल गांधी, पार्टी ने तैयार किया प्लान बी

बीते साल लोकसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और फिर अगस्त में पार्टी ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुना।

हालांकि, 18 महीने बीत जाने के बाद भी कांग्रेस को अपना स्थायी अध्यक्ष नहीं मिला है। पार्टी के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने इसी महीने कहा था कि 99.9% कांग्रेसी

राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाना चाहते हैं लेकिन अब यह सामने आ रहा है कि राहुल गांधी खुद ही अध्यक्ष बनने से हिचक रहे हैं। ऐसे में पार्टी ने अपने लिए एक प्लान बी तैयार किया है।

हमारे सहयोगी हिन्दुस्तान टाइम्स ने अध्यक्ष चुने जाने को लेकर कई कांग्रेस नेताओं से बातचीत की, जिनमें से कुछ पार्टी के कोर ग्रुप में भी शामिल हैं। इनमें से दो ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि राहुल गांधी को मनाने की कई बार कोशिश की गई है लेकिन वह इस पद पर वापसी से हिचक रहे हैं। एक तीसरे नेता ने बताया कि यह कमोबेश अब निश्चित ही मानिए कि हाल-फिलहाल में राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी चीफ के तौर पर वापसी नहीं करेंगे।

सोनिया गांधी के खराब स्वास्थ्य की वजह से पार्टी नेताओं ने एक सक्रिया लीडर की मांग की है। इसी साल अगस्त में कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया को चिट्ठी लिख पार्टी की कार्यशैली में बदलाव किए जाने की मांग की थी।

इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में सांसद शशि तरूर और मनीष तिवारी, राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण शामिल थे।

इस मामले के जानकार एक शख्स ने बताया, ‘पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन सबने सोनिया गांधी से भी बात की है ताकि वह राहुल का फैसला बदल सकें लेकिन हम यही कह सकते हैं कि राहुल अध्यक्ष बनने से हिचक रहे हैं।’

हालांकि, अगर राहुल पार्टी के अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो कांग्रेस के अंदर प्लान बी की भी चर्चाएं जोरों पर हैं, जिसके मुताबिक पार्टी सोनिया गांधी के अंदर चार उपाध्यक्ष नियुक्त कर सकती है। हर जोन के लिए एक उपाध्यक्ष चुना जा सकता है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पहचान न बताने की शर्त पर हमें बताया, ‘सोनिया उसके बाद बस अध्यक्ष पद पर रहेंगे, पार्टी में उनका कोई विरोधी भी नहीं लेकिन ये चार उपाध्यक्ष आपसी सहमति से मिलकर सभी फैसले लेंगे। इन चारों के नीचे भी तीन-तीन जनरल सेक्रटरी रहेंगे।’