मध्‍य प्रदेश में अब कन्या पूजा से शुरू होंगे सरकारी कार्यक्रम

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भोपाल। मध्य प्रदेश में अब सरकारी कार्यक्रमों की शुरूआत कन्या (बेटी) पूजा से होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी विभाग प्रमुख, विभागाध्यक्ष, संभाग आयुक्त, कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत से आदेश का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।

शिवराज सरकार के पिछले कार्यकाल में बेटियों के चरण वंदन से ही सरकारी कार्यक्रमों की शुरूआत होती थी। दिसंबर 2018 में आई कमल नाथ सरकार में यह परंपरा बंद हो गई। मार्च 2020 में फिर से भाजपा सरकार बनी और पुराने निर्णयों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फिर से बेटियों की पूजा करने के निर्देश दिए थे। इसे लेकर गुरुवार को सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं।

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मंत्रालय में सुशासन दिवस मनाया

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के एक दिन पूर्व मंत्रालय में सुशासन दिवस मनाया गया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में प्रात: 11 बजे अधिकारियों और कर्मचारियों को सुशासन दिवस की शपथ दिलाई। इसके पूर्व उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण किया।

सारंग ने सुशासन के उच्चतम मापदण्डोंं को स्थापित करने के लिये संकल्पित रहकर शासन को अधिक पारदर्शी,सहभागी,जनकल्याण केन्द्रित और जबावदेह बनाने के प्रयास करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव,प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल,प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी सहित मंत्रालय,सतपुड़ा एवं विंध्याचल भवन के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे ।

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शंकर व्याख्यानमाला में आचार्य स्वामी अद्वैतानन्द का व्याख्यान रविवार को

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग द्वारा शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन रविवार दिनांक 27 दिसम्बर 2020 को प्रातः 9 बजे किया जा रहा है। इसमें चिन्मय मिशन नाशिक के आचार्य स्वामी अद्वैतानन्द ‘जीवन्मुक्ति’ विषय पर व्याख्यान देंगे। व्याख्यान का लाइव प्रसारण न्यास के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर किया जाएगा।

स्वामी अद्वैतानन्द सरस्वती- एक परिचय

स्वामी जी का जन्म खरगोन, मध्यप्रदेश में हुआ। बिलासपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियर की उपाधि। स्वामी चिन्मयानन्द जी और स्वामी तेजोमयानन्द जी से प्रेरित होकर वर्ष 1989 से 1991 तक स्वामी सुबोधानन्द जी के सान्निध्य में हिमाचल प्रदेश के सिद्धबाड़ी संदीपनी हिमालय में वेदान्त शास्त्रों का अध्ययन किया। वर्ष 2002 में सन्यास दीक्षा प्राप्त की। संदीपनी साधनालय एवं सिद्धबाड़ी में संचालित वेदान्त पाठ्यक्रम के आचार्य रहे। स्वामी जी द्वारा वेदान्त दर्शन पर कई देशों में हिन्दी, मराठी एवं अंग्रजी भाषा में व्याख्यान दिये गये हैं। आचार्य भगवद्गीता, उपनिषदों और वेदान्त विषय की आंतरिक जटिलताओं का खुलासा सहज ढंग से करते हैं। उनका श्री रामचरितमानस का मधुर गायन श्रोताओं को आनन्द की स्थिति में पहुँचाता है। वर्तमान में चिन्मय मिशन, नासिक के आचार्य हैं।

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