प्यार में अंधी बेटी ने मां-बाप के खाने में मिलाई थी नींद की 12 गोलियां, प्रेमी ने उतारा मौत के घाट

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छोटा बांगड़दा स्थित रुक्मणी नगर में 15वीं बटालियन के सिपाही ज्योतिप्रसाद शर्मा और उनकी पत्नी नीलम की हत्या का षड्यंत्र नाबालिग बेटी ने ही रचा था। वह डीजे के साथ रहना चाहती थी। माता-पिता उस पर बंदिश लगाने लगे थे।

इस पर षड्यंत्रपूर्वक उसने खुद खाना बनाया और सब्जी में 12 गोलियां मिला दीं। जैसे ही दोनों गहरी नींद में सोए तो आरोपित धनंजय यादव (डीजे) को दराता व चाकू लेकर बुला लिया और हत्या करवा दी। हत्या कर फरार हुई नाबालिग बेटी व प्रेमी धनंजय गुरुवार रात में मंदसौर के कैलाश मार्ग स्थित होटल से हिरासत में लिए गए।

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रात में ही उन्हें इंदौर पुलिस को सौंप दिया था। डीआइजी हरिनारायणाचारी मिश्र के अनुसार ज्योतिप्रसाद की 16 वर्षीय बेटी केंद्रीय विद्यालय में 10वीं में पढ़ती है। दो साल से उसका गांधीनगर निवासी धनंजय से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन ज्योति को डीजे से मिलना पसंद नहीं था। लड़की ने माता-पिता को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा।

एक दिन पहले ही 500 रुपये में खरीदा था चाकू

मैं ज्योतिप्रसाद की नाबालिग बेटी से प्रेम करता हूं। उसने बताया था कि माता-पिता परेशान करते हैं। कभी भी मोबाइल चेक कर लेते हैं। मेरा वाट्सएप मां के फोन में चलता है। मां का वाट्सएप मेरे फोन में एक्टिव था। दो दिन पहले भी हम दोनों को रोहित के फ्लैट में देख लिया था। लड़की के भाई ऋषभ के दोस्त भी मेरा पीछा करने लगे थे। लड़की ने कहा कि इन्हें मारना जरूरी है। साजिश के तहत एक दिन पूर्व ही गांधीनगर से 500 रुपये में चाकू खरीदा। करीब 4 बजे मैं दोस्त का स्कूटर लेकर आया और ज्योति व नीलम का कत्ल कर फरार हो गए। हम दोनों शादी कर राजस्थान में ही बसना चाहते थे। मुझे हत्या का कोई पछतावा नहीं है।

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पापा जिंदा बचते तो मुझे कहीं से भी पकड़ लाते

पापा-मम्मी से तंग आ चुकी थी। डीजे से मिलना उन्हें पसंद नहीं था। घर का माहौल भी अच्छा नहीं था। रोज-रोज कलह होती थी। पहले सोचा मैं और डीजे भाग जाते हैं, लेकिन मुझे पता था कि पापा पुलिसवाले हैं। उनकी पहचान है। हम दोनों को कहीं से भी ढूंढ़ कर पकड़ लेते। इसलिए उन्हें मारना जरूरी था

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