5 करोड़ गन्ना किसान तथा श्रमिकों को मोदी सरकार का तोहफा

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नई दिल्लीः किसान आंदोलन के बीच मोदी सरकार ने गन्ना किसानों का तोहफा दिया है। केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है।

कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने इसकी जानकारी दी। सरकार 60 लाख टन चीनी निर्यात करेगी। उससे जो आय और कमाई होगी उसे 5 करोड़ किसानों के खाते में डाला जाएगा। विभिन्न चीनी मिलों में 5 करोड़ किसान और 5 लाख श्रमिकों को फायदा होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस साल शक्कर का उत्पादन 310 लाख टन होगा।

देश की खपत 260 लाख टन है। शक्कर का दाम कम होने की वजह से किसान और उद्योग संकट में है। इसको मात देने के लिए 60 लाख टन चीनी निर्यात करने और निर्यात को सब्सिडी देने का फैसला किया गया है।

3500 करोड़ रुपए की सब्सिडी, प्रत्यक्ष निर्यात का मूल्य 18000 करोड़ रु. किसानों के खाते में जाएगा। इसके अलावा घोषित सब्सिडी का 5361 करोड़ रुपया एक सप्ताह में किसानों के खाते में जमा कर दिया जाएगा। एक हफ्ते के भीतर ही 5000 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी किसानों को मिलेगी, 60 लाख टन चीनी को 6 हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से निर्यात किया जाएगा।

चीनी निर्यात के लिए 3,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी

उम्मीद है कि इससे चीनी मिलों की बिक्री बढ़ेगी और नकद धन आने से उन्हें किसानों के गन्ने का के बकाये का भुगतान करने में मदद मिलेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद बताया कि सीसीईए ने 60 लाख टन चीनी निर्यात के लिए 3,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी है। सब्सिडी की राशि सीधे किसानों को दी जाएगी। जावड़ेकर ने कहा कि चीनी उद्योग के साथ गन्ना किसान भी संकट में हैं।

देश में चीनी का उत्पादन खपत से अधिक है। इस बार उप्तादन अनुमानित 310 लाख टन रहेगा जबकि घरेलू मांग 260 लाख टन की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पांच करोड़ किसानों को लाभ होगा। सरकार ने 2019-20 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान एकमुश्त 10,448 रुपये प्रति टन की निर्यात सब्सिडी दी थी। इससे सरकारी खजाने पर 6,268 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चीनी मिलों ने 2019-20 के विपणन सत्र में 60 लाख टन निर्धारित कोटा की तुलना में 57 लाख टन चीनी का निर्यात किया था।

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