हाई कोर्ट ने कहा: ज़मानत के लिए वृध्दाश्रमों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए 50 हजार रुपये का डीडी जमा करो

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इंदौर। आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप में जेल में बंद एक आरोपित की जमानत याचिका स्वीकारते हुए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अनूठी शर्त रखी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपित इंदौर जिले के वृध्दाश्रमों में रह रहे बुजुर्गों की देखभाल के लिए 50 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा कराए। इसके बाद ही उसे जमानत मिलेगी। आरोपित को विचारण न्यायालय के समक्ष तीन लाख रुपये की जमानत और इतनी ही रकम का निजी मुचलका भी भरना होगा।

गणेश नगर निवासी राजेश गौड़ पर आरोप है कि उसने सतीश बिल्लौरे नामक व्यक्ति को इतना प्रताड़ित किया कि परेशान होकर उसने आत्महत्या कर ली। मृतक के पास से मिले सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र था। इसमें लिखा था कि सतीश ने आरोपित से 16 हजार रुपये ब्याज पर उधार लिए थे। इसके एवज में वह 60 हजार रुपये ब्याज मांग रहा था। आरोपित ने मृतक की कार भी जब्त कर ली थी। सुसाइड नोट के आधार पर पलासिया पुलिस थाने में आरोपित के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप में धारा 306 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया। 24 अगस्त 2020 से ही आरोपित जेल में है। उसने एडवोकेट धर्मेंद्र चेलावत के माध्यम से हाई कोर्ट में जमानत याचिका प्रस्तुत की। इसमें कहा कि आरोप गलत हैं। आरोपित ने कभी मृतक को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित नहीं किया। मामले में जांच पूरी कर पुलिस चालान पेश कर चुकी है।

 

हाई कोर्ट की एकल पीठ ने जमानत याचिका स्वीकारते हुए आदेश दिया कि आरोपित इंदौर जिले के वृध्दाश्रमों में रह रहे बुजुर्गों की देखभाल के लिए 50 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जिला बाल संरक्षण समिति इंदौर के नाम से तैयार करवाए। यह डीडी उसे प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के पास जमा कराना होगा। कोर्ट ने कलेक्टर को भी आदेश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि यह रकम बुजुर्गों की देखभाल पर ही खर्च हो। इसका अलग से हिसाब भी रखना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर उसे कोर्ट में पेश किया जा सकें।

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