मध्य प्रदेश में थम सकते हैं बसों के पहिए, किराया बढ़ाने की मांग

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भोपाल। बसों के संचालन में कोरोना संक्रमण के प्रकोप का असर अब तक दिख रहा है। शादियों के सीजन पर भी बसों में लोग उम्मीद से कम ही सफर कर रहे हैं।

इंदौर मार्ग पर भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) की चार्टेड व बाकी साधारण बसों में 20 फीसद से अधिक यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ी रही है। चार्टेड बसों में इंदौर, उज्जैन, नीमच, छिंदवाड़ा, रीवा, नसरुल्लागंज, सागर समेत अन्य मार्गों पर चलने वाली बसों में सफर करने वाले लोग शादियों के सीजन में भी कम हैं। लगातार घाटे से जूझ रहे अब बस संचालक जल्द ही प्रदेश भर में बसों का संचालन बंद करने का मन बना चुके हैं। मप्र प्राइम रूट बस एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर जल्द ही बैठक कर हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा।

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शहर में चारों बस स्टैंडों पर नहीं लौट रही रौनक

राजधानी भोपाल में स्थित आइएसबीटी, नादरा, लालपुर और पुतली घर बस स्टैंडों पर रौनक नहीं लौट रही है। कम यात्रियों के बसों में सफर करने से चारों बस स्टैंडों पर कोरोना से पहले की तरह चहल-पहल नहीं दिख रही है। बस संचालकों का कहना है कि उम्मीद थी कि शादियों के मुहूर्त शुरू होने पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन ज्यादा यात्री नहीं बढ़ पा रहे। कुल 733 में से 195 बसों का ही संचालन हो रहा है।

50 फीसद किराया बढ़ने से ही होगी घाटे की पूर्ति

बस संचालक सुरेन्द्र तनवानी ने बताया कि मप्र शासन ने अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर माह का 15 दिन साढ़े पांच महीने) का टैक्स माफ किया था। इसके बाद पांच सितंबर से राजधानी सहित प्रदेश भर में पांच सितंबर से बसों का संचालन शुरू हुआ था, लेकिन कोरोना के कारण यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ने से घाटा उठाना पड़ रहा है। घाटे की पूर्ति 50 फीसद यात्री किराया बढ़ने के बाद ही हो सकती है।

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