इन पांच गांवों में पैदा होते ही शादी पक्की, जवानी में संबंध तोड़ा तो देना पड़ता है जुर्माना

सोंईकलां। श्योपुर जिले में बंजारा समाज के पांच गांव ऐसे हैं, जहां बच्चों के जन्म लेते ही उनकी शादियां पक्की कर दी जाती हैं। शादी बालिग होने के बाद की जाती है।

रिश्ता पक्का होने के बाद लड़के या लड़की वालों ने शादी से इनकार किया तो उसे रिश्ता तोड़ने के बदले में 95 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ता है। यदि लड़का या लड़की घर से भागे या किसी और से संबंध रखे, तो उसे ढाई लाख रुपये तक का दंड भरना पड़ता है।

बंजारा समाज के यह पांच गांव रामबाड़ी, भीकापुर, हनुमानखेड़ा, मल्होत्रा और सौभागपुरा हैं। यह गांव करीब चार किलोमीटर के दायरे में सटकर बसे हैं और श्योपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर हैं। बंजारा समाज के युवक-युवतियों की शादी इन पांच गांवों में ही होती है। इन गांवों का बेटा या बेटी का संबंध इन पांच गांवों से बाहर कहीं नहीं किया जाता। किसी को यदि कारणवश संबंध तोड़ना होता है तो उसका फैसला पंचायत करती है। पंचायत के सामने ही संबंध तोड़ने वाले हर्जाने के तौर पर दूसरे पक्ष को नकद रुपये देता है।

इन्हें देना पड़ा जुर्माना

-सौभागपुरा के ठाकरी बंजारा के बेटे बल्लू का संंबंध पांच दिन की उम्र में सौभागपुरा के ही गुलाब बंजारा की बेटी नानू से तय हुआ था, लेकिन बालिग होने के बाद बल्लू ने नानू से शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद संबंध तोड़ने के लिए पंचायत हुई, उसमें बल्लू के पिता ठाकरी को 95 हजार का जुर्माना लड़की वालों को देना पड़ा।

-सौभागपुरा के ही गोली बंजारा के बेटे राकेश का संबंध घनश्याम बंजारा की बेटी फूलवती से हुआ। बाद में राकेश को फूलवती पसंद नहीं आई। इसके बाद पंचायत में संबंध तोड़ा गया और 25 हजार का जुर्माना अदा करना पड़ा।

-हनुमानखेड़ा के हजारी बंजारा की बेटी जानकी का संबंध रामबाड़ी के सुंदरलाल बंजारा के बेटे से विक्की से बचपन में ही तय हो गया था। बालिग होने के बाद जानकी ने विक्की से शादी करने से इनकार कर दिया। पंचायत में जानकी के पिता को संबंध तोड़ने के बदले विक्की के परिवार को 95 हजार का हर्जाना देना पड़ा।

-मल्होत्रा गांव के श्रवण बंजारा के बेटे दिनेश का संबंध मेगा बंजारा की बेटी रामधारा से बचपन में तय हो गया, लेकिन बालिग होने के बाद दिनेश को रामधारा पसंद नहीं आई। शादी तोड़ने के बदले दिनेश ने रामधारा के पिता को 95 हजार का हर्जाना दिया।

 

पांच साल पहले से शुरू हुई दंड प्रथा

 

 

बंजारा समाज में लड़के या लड़की के घर से भाग जाने या फिर शादी पक्की होने के बाद किसी और लड़की-लड़के से संबंध बनाने या घर से भाग जाने पर जुर्माना वसूलने की प्रथा तो कई पीड़ियों पुरानी है। बचपन में हुई शादी को तोड़ने पर दंड भुगतने की प्रथा करीब पांच साल पहले ही शुरू हुई है।

दंड भरे बिना शादी की तो मकान फूटेगा, जुर्माना भी ज्यादा

यदि कोई शादीशुदा महिला या पुरुष घर से भागकर किसी दूसरी महिला या पुरुष के साथ घर बसा लेता है तो उसे भारी नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसा करने वाले डेढ़ से ढाई लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ता है। बंजारा समाज के एक युवक ने पत्नी को छोड़ दूसरी युवती से शादी कर ली। इसके बाद समाज के लोगों ने उस युवक का घर तोड़ दिया था।

इनका कहना है

हमारे यहां बचपन में शादियां पक्की कर दी जाती हैं, यह प्रथा पूर्वजों के जमाने से चली आ रही है। शादियां लड़की-लड़के के बालिग होने के बाद ही की जाती है।

गोपाल बंजारा, सरपंच, नंदापुर।

– बचपन में तय हुई शादी और परिवार के बड़ों का सम्मान बचाने के लिए संबंध तोड़ने पर जुर्माने की प्रथा शुरू की गई है। जुर्माना लगने के बाद कई संबंध टूटने से बच गए। इसके अलावा कोई दूसरा उद्देश्य नहीं

सुग्रीव बंजारा, रामबाड़ी निवासी।