Make In INDIA: दरवाजे, खिड़की की चौखट के लिए न कटें पेड़ इसलिए सीमेंट- कांक्रीट से तैयार किया ऐसा विकल्प

बिलासपुर। Make In INDIA: दरवाजे और खिड़कियों के चौखट के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई की जा रही है। जंगल घट रहे है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है ऐसे में बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर निवासी मोहम्मद नाजिम ने नया विकल्प प्रस्तुत किया है।

कमाई की चिंता छोड़ कर उन्होंने सीमेंट, कांक्रीट के खिड़की, दरवाजे के चौखट तैयार कर दूसरों को भी प्रेरित कर रहे है कि ‘जंगल है तो कल है’ की भावना के साथ हम भवनों का निर्माण करें तो भविष्य सुखद है अन्यथा परेशानी और बढ़ सकती है।

समाज हित में उनकी इस कोशिश को लोगों का प्रतिसाद भी मिल रहा है। लकड़ी की उपलब्धता कम हो रही है, ऐसे में कांक्रीट की चौखटें विकल्प बन सकती हैं। इसका सफल प्रयोग वे वाड्रफनगर क्षेत्र में कर चुके हैं। दरवाजा फ्रेम, रेडीमेड खिड़की फ्रेम बनाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए उनके प्रयास को अब लोग आत्मसात करने लगे है। बलरामपुर जिला खासकर वाड्रफनगर अनुविभाग क्षेत्र में जंगल से लगा है। वन बाहुल होने के कारण जिले में लकड़ी की चौखटों का प्रचलन सबसे ज्यादा है।

 

छोटा, लेकिन कारगर प्रयास

 

इमारती लकड़ी न केवल महंगी हुई है बल्कि भवन निर्माण में खिड़की, दरवाजे की चौखट की मांग ज्यादा होने से लकड़ी चौखट का अब तक विकल्प नहीं होने के कारण पेड़ ज्यादा कट रहे हैं और ईमारती लकड़ी काफी महंगी व मुश्किल से मिल पा रही है।

आने वाले समय में इसकी दिक्कत और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर जंगल व पर्यावरण पर होगा। वृक्ष हमें आजीवन निःशुल्क आक्सीजन प्रदान करता है ऐसे में सिमटते जंगल से भविष्य की परेशानियों से बचाव के लिए मोहम्मद नाजिम ने जो प्रयास किया है वह छोटा, लेकिन कारगर प्रयास है।

यह हैं फायदे

कांक्रीट की चौखट हर मौसम के अनुकूल रहेगी। पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। दीमक से कोई खतरा नहीं, बनाना और लगाना आसान है, आग की घटनाओं में सुरक्षित रहेंगी। लकड़ी और लोहे की अपेक्षा औसत दाम में यह सस्ती भी है।