कमजोर अर्थव्यवस्था में नहीं करनी थी नोटबंदीः यशवंत सिन्हा

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नई दिल्ली। नोटबंदी और जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर ला चुके पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने गुरुवार को फिर अपनी बात दोहराई। उन्होंने अपने बेटे और केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के आर्टिकल को लेकर कहा कि लंबी अवधि में फायदे की दलील बेकार है। लंबी अवधि की बात होती है तो मुछे कायनीज का एक कोट याद आता है जो कहता है कि इन दि लॉन्ग रन वी ऑल आर डेड।

उन्होंने अपने बयान के बाद शुरु हुए विवाद पर गुरुवार को फिर मीडिया से बात की और कहा कि बहुत पहले से हम जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ रही है। 2014 के पहले मैं पार्टी का प्रवक्ता था और जहां तक आर्थिक मामलों की बात आती है हम यूपीए सरकार की स्थिति को पॉलिसी पैरालिसिस बताते थे।

ताजा हालात को लेकर सिन्हा ने कहा कि हम इसके लिए पिछली सरकार को दोष नहीं दे सकते क्योंकि हमें पूरा मौका मिला है। मैं जीएसटी का समर्थक रहा हूं लेकिन सरकार इसे जुलाई से लागू करने की जल्दबाजी में थी। अब जीएसटीएन जो की जीएसटी की रीढ़ है वो कमजोर हो गई है।

सिन्हा ने आगे कहा कि अगर आप कांग्रेस के वित्त मंत्री को छोड़ दें तो मैं ही एक ऐसा व्यक्ति हूं जिसने 7 बार बजट पेश किया है। हो सकता है राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल को मुझसे ज्यादा आर्थव्यवस्था का ज्ञान हो जिसके बूते वो भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बता रहे हैं लेकिन मैं इस विचार से पूरी तरह असहमत हूं।

सिन्हा आगे बोले कि सरकार का सबसे पहला टास्क बैंकों की हालत सुधारना था जिसका हम अभी तक इंतजार ही कर रहे हैं। जब अर्थव्यवस्था कमजोर थी तब नोटबंदी नहीं की जानी चाहिए थी, इसके प्रभाव खत्म नहीं हुए थे और सरकार जीएसटी ले आई जिसने दूसरा बड़ा झटका दे दिया।

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