Madhya Pradesh By election 2020-प्रदेश की सबसे लकी सीट! जिस पार्टी का विधायक उसकी प्रदेश सरकार

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Madhya Pradesh By election 2020 भोपाल: मप्र की जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें एक नेपानगर सीट भी है। नेपानगर सीट के बारे में मिथक है कि यहां से जिस दल का उम्मीदवार चुनाव जीतता है, सरकार उसी की बनती है। ये मिथक अबतक टूटा नहीं है।

जी हां और 1977 से लेकर 2018 तक नेपानगर का ये मिथक नहीं टूटा है। यानी नेपानगर सीट राजनीतिक दलों के लिए ट्रंप कार्ड है। सरकार बनाने की श्योरिटी है, मिथक तो यही कहता है। नेपानगर का चुनावी इतिहास देखे तो यहां 1977 से लेकर 2018 तक 9 चुनाव हुए और एक उपचुनाव हुआ। इन चुनावों में जिस पार्टी का कैंडिडेट जीता उसी पार्टी की सरकार बनी है।

जो ये सीट जीता वो ही रहा सिकंदर!

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– 1977 का चुनाव बीजेपी के बृजमोहन मिश्रा ने जीता था और उस समय बनी थी बीजेपी की सरकार, वीरेंद्र कुमार सखलेचा मुख्यमंत्री बने थे

– 1980 के चुनाव में कांग्रेस के तनवंत सिंह कीर ने जीत दर्ज की और प्रदेश में अर्जुन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी

– 1985 में एक बार फिर तनवंत सिंह कीर नेपानगर से चुने गए और प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी, मोतीलाल वोरा मुख्यमंत्री बने

– 1990 में बीजेपी के बृजमोहन मिश्रा ने फिर चुनाव जीता और अबकि बार बीजेपी की सरकार बनी, सुदंरलाल पटवा प्रदेश के मुख्यमंत्री बने

– 1993 में तनवंतसिंह कीर ने फिर चुनाव जीता और प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार बनी

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– 1998 में कांग्रेस ने रघुनाथ चौधरी को टिकट दिया जो यहां से चुनाव जीते और दिग्वजय सिंह की सरकार बनी

– 2003 में नेपानगर में बदलाव हुआ बीजेपी की तरफ से अर्चना चिटनीस ने जीत दर्ज करवाई और प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी, उमा भारती मुख्यमंत्री बनी

– 2008 में बीजेपी के राजेंद्र दादू चुनाव जीते और शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनी

– 2013 में भी बीजेपी के राजेंद्र दादू चुनाव जीते सरकार शिवराज की ही बनी

– बीजेपी विधायक राजेंद्र दादू के असामायिक निधन के बाद सीट खाली हुई बीजेपी ने राजेंद्र दादू की बेटी मंजू दादू को टिकट दिया था। सहानुभूति की लहर पर सवार होकर 2016 के उपचुनाव में मंजू दादू ने जीत दर्ज की और सरकार बीजेपी की थी

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– इसके बाद 2018 का चुनाव बीजेपी के लिए तो टर्निंग पाइंट रहा मगर नेपानगर सीट से जुड़ा जो मिथक है वो सच साबित हुआ।

– 2018 में कांग्रेस ने सुमित्रा कास्डेकर को टिकट दिया। सुमित्रा कास्डेकर ने 1500 वोटों से मंजू दादू को मात दी और प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस ने वापसी की मुख्यमंत्री बने कमलनाथ

अब राजनीतिक दलों के लिए लकी कहे जाने वाली नेपानगर सीट पर उपचुनाव होना है। अबतक तो नेपानगर सीट से जुड़ा मिथक टूटा नहीं क्या इस उपचुनाव में मिथक टूटेगा। जोर आजमाइश दोनों तरफ से है, क्योंकि ये उपचुनाव सरकार बनाने और बिगाड़ने वाला चुनाव है।

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