कटनी कलेक्टर के आदेश से मचा बवाल, DM बोले यह तो नवाचार

कटनी/ भोपाल। कटनी कलेक्टर शशिभूषण सिंह के एक आदेश से इन दिनों कटनी से लेकर भोपाल तक बवाल मचा है। कलेक्टर जहां इसे नवाचार कह रहे हैं तो वहीं जानकर इसे आरटीई का उल्लंघन बता रहे हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला।

राइट टू एजुकेशन यानी शिक्षा का अधिकार के तहत सुनिश्चित किया गया है कि स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक का होना अनिवार्य है। राइट टू एजुकेशन में शिक्षक की योग्यता पर जोर दिया गया है परंतु कटनी के कलेक्टर ने RTE के नियमों के खिलाफ शिक्षक भर्ती आदेश जारी कर दिया।

आदेश क्रमांक आरएमएसए/2020/3805 दिनांक 16 अक्टूबर 2020 जो शिक्षक विहीन शालाएं शासकीय हाई स्कूल/उमावि के प्रभारी प्राचार्य ओं के नाम संबोधित है, में लिखा है कि शैक्षणिक व्यवस्था हेतु आपके ग्राम में स्नातक/स्नातकोत्तर उत्तीर्ण विद्यार्थी जो आपके विद्यालय में निशुल्क अध्यापन कार्य करने हेतु इच्छुक हो को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करके विद्यार्थियों को पढ़ाने की अनुमति प्रदान करें।
भारत सरकार द्वारा बनाए गए शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार नर्सरी कक्षाओं को छोड़कर किसी भी प्रकार की कक्षा में ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसने अध्यापन कार्य के लिए प्रोफेशनल कोर्स (D.Ed-B.Ed) ना किया हो, नियमित रूप से अध्यापन नहीं करा सकता। उसे शिक्षक या शिक्षक के समकक्ष किसी भी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता चाहे उसे वेतन दिया जाए या नहीं, और जब बात हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल की हो तो शिक्षक की नियुक्ति काफी गंभीर विषय होता है। इन कक्षाओं में तो प्राइवेट स्कूल भी अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सकते।
यहां समझना होगा कि एक शिक्षक की नियुक्ति और कलेक्टर कार्यालय में क्लर्क या फिर ग्राम पंचायत में रोजगार सहायक की नियुक्ति के बीच अंतर होता है। शिक्षक की नियुक्ति एक गंभीर विषय है फिर चाहे उसका वेतन कुछ भी क्यों ना हो। शिक्षक की नियुक्ति के नियम कलेक्टर निर्धारित नहीं कर सकते। वह केवल स्कूलों की जांच कर सकते हैं और अयोग्य व लापरवाह शिक्षकों को दंड की कार्रवाई कर सकते हैं।