मंगल पर जीवन… डॉ. रामकरण को मिली बड़ी कामयाबी, मंगलयान को लेकर डॉ. रामकरण शर्मा ने बताया

मंगल ग्रह पर जीवन की खोज की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। बागपत के गांव ट्योढ़ी निवासी वैज्ञानिक डॉ. रामकरण शर्मा ने जर्मनी, इटली, सऊदी अरब और फ्रांस के शोधकर्ताओं के साथ अंटार्कटिका में मिले एक सूक्ष्मजीव की विशेषताओं का पता लगाया है।

  
इन विशेषताओं के कारण यह जीव मंगल ग्रह पर मिली झील के समान परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है। शोध को स्विट्जरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय साइंस जर्नल ‘माइक्रोऑर्गनिज्म’ ने स्वीकार किया है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय में भी इस जीव पर डॉ. रामकरण शोध कर चुके हैं, जिसे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने वित्तीय सहयोग दिया था। 
यह विशेष सूक्ष्मजीव अंटार्कटिका में नमकीन झील डीप लेक से खोजा गया था। झील में स्थितियां मंगल ग्रह की तरह ही हैं। यहां अत्यंत ठंडा और खारा पानी है और माइनस 10 डिग्री से नीचे तापमान रहता है। इस जीव से यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि मंगल ग्रह पर कैसे जिंदा रहा जा सकता है। फोन पर में अमेरिका से डॉ. रामकरण शर्मा ने बताया कि इस जीव में एक एंजाइम लैक्टेज (बीटा-गैलेक्टोसिडेस) मिला है।

इस एंजाइम की खास बात यह है कि जिन लोगों को दूध पीने के बाद पेट में ऐंठन, अफारा, डायरिया और गैस की प्रॉब्लम हो जाती है, उनके इलाज में भी उपयोगी साबित होगा। यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने 2018 में मंगल ग्रह पर नमकीन पानी की जिस झील का पता लगाया था, वह मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के नीचे है और करीब 20 किमी चौड़ी है। लाल ग्रह के नाम से प्रसिद्ध मंगल पर पानी मिल जाने से वहां भविष्य में मानव के बसने की संभावना जताई जा रही है।

अच्छा काम कर रहा मंगलयान
डॉ. रामकरण शर्मा का कहना है कि यह तो अभी मालूम नहीं है कि मंगल ग्रह के वातावरण में जीवन उपस्थित है या नहीं, लेकिन नासा और अन्य देशों की एजेंसी इसका पता लगाने में जुटी हैं। भारत ने भी मंगलयान वहां भेजा था, जो अच्छा काम कर रहा है। उनके समूह का यह शोध वैज्ञानिकों को एक नया रास्ता दिखाने का काम करेगा।