देश में पहली बार शुरू होगी इन कर्मचारियों की गणना, वेतन पर होगा विचार

प्राइवेट कर्मचारियों के लिए काम की खबर है। सरकार बहुत जल्‍द इन कर्मचारियों के लिए एक गणना शुरू करने जा रही है। इसका मकसद इन कर्मचारियों के बारे में जानकारी जुटाना है। इसका सीधा सा लाभ यह होगा कि कवायद के दौरान इनके वेतन पर भी विचार किया जाएगा। आने वाली 21 अक्‍टूबर को इस संबंध में एक मीटिंग होने जा रही है। इसके बाद तैयारियों में तेजी आ सकती है। देश में पहली बार घरेलू कामगारों की मिनी गणना शुरू होने जा रही है। सरकार घरेलू कामगारों का डाटा बनाना चाहती है, ताकि आने वाले समय में उन्हें भी सामाजिक सुरक्षा के साथ न्यूनतम वेतन दिलाया जा सके। घरेलू कामगारों के साथ पेशेवरों एवं प्रवासी श्रमिकों का भी सर्वे किया जाएगा। श्रम मंत्रालय के श्रम ब्यूरो को इस काम की जिम्मेदारी दी गई है। ब्यूरो ने श्रम सर्वे के मामले में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दो अर्थशास्त्रियों एसपी मुखर्जी एवं अमिताभ कुंडू की एक कमेटी बनाई है, जो सर्वे का प्रारूप तय करेगी। मंत्रालय इस सर्वे या मिनी गणना के जरिये घरेलू कामगारों के वास्तविक आंकड़ों तक पहुंचना चाहता है, ताकि उनके हक में नीति बनाई जा सके। यह सर्वे घरों में जाकर किया जाएगा। लेकिन, घरों में सफाई व खाना बनाने वाले कामगारों के साथ और किन-किन लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा, इसका निर्धारण कमेटी करेगी। 21 अक्टूबर को इस संबंध में बैठक बुलाई गई है।

श्रम मंत्रालय के मुताबिक, अभी चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील, डॉक्टर, फैशन डिजाइनर जैसे पेशेवरों का भी कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए पेशेवरों का भी सर्वेक्षण कराया जाएगा। प्रवासी श्रमिकों के आंकड़ों पर सरकार का विशेष ध्यान है। इसलिए उनका सर्वेक्षण भी शुरू होने जा रहा है। श्रम मंत्रालय के मुताबिक, नए श्रम कानून को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

श्रम मंत्री की तरफ से सभी राज्यों को नया श्रम कानून लागू करने की दिशा में तेजी लाने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। हालांकि, समवर्ती सूची में होने के कारण केंद्र का नया श्रम कानून लागू होने पर पुराना कानून स्वतः बदल जाएगा।श्रम मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अगले साल जनवरी से घरेलू कामगारों की मिनी गणना का काम हर हाल में शुरू हो जाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक घरेलू कामगारों का कोई डाटा नहीं है।