बड़े भाई को फ्रीजर में डाल परिवार करने लगा मरने का इंतजार, 20 घंटे बाद ऐसे बची जान

सुरामंगलम पुलिस ने बताया कि 73 वर्षीय बालासुब्रम्यम कुमार एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे। वह 15 वर्ष पहले सेवानिवृत हो गए थे। उनकी पत्नी ऊषा की दो साल पहले मौत हो गई थी। उनके कोई बच्चे नहीं थे इसलिए वह अपने भाई श्रवणन (70) के घर रहने आ गए।
पुलिस के अनुसार श्रवणन ने शादी नहीं की थी। अपनी बहन की दो बेटियों जयश्री और सुधा के साथ रहते हैं। दो दिन पहले सुधा अपने इलाज के लिए कोयम्बटूर गई थीं। घर पर जयश्री, बालासुब्रम्यम और श्रवणन थे।

बता दें कि श्रवणन के बुजुर्ग भाई इन दिनों काफी बीमार चल रहे थे। इसके बाद श्रवणन ने बड़ भाई को अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन कुछ दिन पहले ही परिजनों ने बीमार स्थिति में ही बुजुर्ग को अस्पताल से डिस्चार्ज करवा लिया था। इसके बाद परिजनों ने फ्रीजर मंगवाया और रातभर बुजुर्ग को उसी फ्रीजर बॉक्स में डाल दिया जिसमें डेडबॉडी रखा जाता है।

जब फ्रीजर बॉक्स को वापस लेने के लिए एजेंसी का एक कर्मचारी उनके घर पर आया तो देखा कि उसमें बुजुर्ग सांस लेने के लिए तड़प रहा है। उसने उसे जिंदा देखकर  बुजुर्ग को  बाहर निकाला और आनन फानन में अस्पताल में भर्ती करवाया और फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

परिवार को लगा कि दो घंटे में मरने वाले हैं
पुलिस ने बताया कि हैरानी वाली बात है कि श्रवणन और जयश्री ने कहा कि उन्हें लगा कि बालासुब्रम्यम दो घंटे में मरने वाले हैं इसलिए उन्होंने फ्रीजर मंगवाकर उन्हें उसके अंदर बंद कर दिया था। पुलिस ने बताया कि 20 घंटे तक बुजुर्ग का शरीर फ्रीजर में बंद रहा।

पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने मामले में लापरवाही बरतने और बड़े भाई के जान जोखिम में डालने का केस दर्ज किया है और मामले की छानबीन कर रही है।