हाईकोर्ट द्वारा स्कूल फीस मामला अंतिम फैसले हेतु सुरक्षित

आशीष शुक्ला..

जबलपुर, यशभारत।  जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा स्कूल फीस मामला अंतिम फैसले हेतु सुरक्षित रख लिया गया है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि पालक अपने बच्चे को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते है तो उन्हें फीस भरना होगी। फीस भुगतान ना होने की दशा में नाम काट सकेंगे स्कूल। प्रदेश के बहू चर्चित स्कूल फीस मामले में आज सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय की खंड पीठ ने मामले को अंतिम निर्णय हेतु सुरक्षित कर दिया है।

सुनवाई के प्रारम्भ में कोर्ट के सभी पक्षकारो से पुछा की पिछली सुनवाई के आदेश अनुसार किस किस ने मामले को सुलझाने हेतु अपना प्रस्ताव दिया है। प्राइवेट सीबीएसई स्कूल्स एसोसिएशन इंदौर की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता  पियूष माथुर एवं सोसाइटी फॉर प्राइवेट स्कूल डाइरेक्टर्स (सोपास) एवं एसोसिएशन ऑफ़ अन एडेड प्राइवेट स्कूल्ज की ओर से पैरवी करते हुए सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने बताया की, माननीय न्यायालय के आदेश के बावजूद अभी भी सदस्य स्कूलों के लगभग 50% विद्यार्थियों ने ट्यूशन फीस की एक भी किश्त का भुगतान नहीं किया है।

साथ ही उन्होंने बताया की एसोसिएशन ने सदस्य सभी स्कूलों ने फीस भुगतान ना होने के विद्यार्थिओं को ऑनलाइन क्लासेज से वंचित नहीं किया हैं। न्यायालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट कहा की फीस भुगतान ना करने वाले विद्यार्थयों का नाम तुरंत काटा जाना चाहिए।

माननीय उच्च न्यायालय ने समाजसेवियों एवं कुछ अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर तल्ख़ टिपण्णी करते कहा कि यदि पालक अपने बच्चों को उच्चस्तरीय निजी विद्यालयों में शिक्षित करवाना चाहते हैं तो उन्हें उनकी फीस भी भरना होगी क्योंकि इस महामारी में प्राइवेट स्कूलों को किसी भी प्रकार की कोई रियायत सरकार द्वारा नहीं दी गई है।

न्यायलय ने स्पष्ट किया की वे ऐसी किसी जनहित याचका का संज्ञान नहीं लेंगे और ना इन मामलों में हड़ताक्षेप करेंगे।

पालक संघ के अधिवक्ता ने ऑनलाइन क्लासेज की दुष्परिणाम बताते हुए प्राथमिक कक्षाओं हेतु इन पर रोक लगाने का अनुरोध किया तो माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय ने इसको खारिज करते हुए स्पष्ट किया की ऑनलाइन क्लासेज यथावात चालू रहेंगी।
सभी के तर्क सुनने के पश्चात माननीय न्यायालय से मामले को अंतिम फैसले हेतु सुरक्षित कर दिया है।