ठंड में प्रदूषण के कारण संकट बढ़ाएगा कोरोना, डटकर करें सामना

भोपाल। वर्ष 2016 से 2018 तक दो साल तक प्रदूषण में बढ़ोतरी होने के बाद 20 19 और 2020 में अब तक की स्थिति में मामूली कमी जरूर आई है इस साल की ठंड शहरवासियों को भारी पड़ सकती है।

हर साल जनवरी के आसपास शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, इस बार कोरोना के मरीज और संक्रमण के लिए यह घातक हो सकता है।

लिहाजा हमें हर स्तर पर सतर्क रहना होगा जिससे की हम आने वाले संकट का बेहतर सामना कर सकें। हर साल जनवरी व आसपास के माह में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 व 10 का स्तर क्रमशः 422 व 334 तक बढ़ जाता है।

हवा प्रदूषित होती है और वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार चला जाता है जो कि 50 या उससे नीचे होना चाहिए, तब हवा शुद्ध मानी जाती है।

प्रदूषण की वजह धूल के कण हैं जो शहर में हो रहे निर्माण कार्यों व खराब सड़कों से निकल रहे हैं। यदि इस पर अंकुश लगा दिया जाए तो प्रदूषण से काफी हद तक निपटा जा सकता है।

यह प्रदूषण रोग प्रतिरोधक क्षमता तो कम करता ही है, श्वास, कैंसर, अस्थमा, फेफड़े व त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की मुश्किल भी बढ़ाता है। बीते दो दिन से सूचकांक 117 तक पहुंच रहा है, आगे भी बढ़ना तय है।