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नाराज शिक्षक बोले अब किसी अध्यापक को नहीं बनाना विधायक

भोपाल। लंबे समय बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपनी मांगों पर बात करने पहुंचे अध्यापक संगठनों के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि अब किसी अध्यापक को विधायक का टिकट न दें। हमारी शिक्षक बनाने की मांग है, नेता या विधायक की नहीं।

अध्यापक 17 दिसंबर का कार्यक्रम निरस्त होने से नाराज थे। इसलिए मुख्यमंत्री ने उन्हें गुरुवार देर रात चर्चा के लिए बुलाया था। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री राज्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष रहे मुरलीधर पाटीदार को विधायक बना चुके हैं।

मुख्यमंत्री निवास में रात सवा नौ बजे शुरू हुई बैठक साढ़े 11 बजे तक चली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी अध्यापक संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों से बात की। उनकी समस्याएं और मांगें सुनीं। सूत्र बताते हैं कि बैठक में मुख्यमंत्री चौहान ने अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन के संकेत दिए हैं।

यहां 12 जुलाई 1994 को समाप्त कैडर के व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक कैडर को पुनर्जीवित करने की मांग रखते हुए अध्यापकों ने कहा कि इन पदों पर अध्यापकों को वरिष्ठता और योग्यता के हिसाब से पदस्थ कर दें, तो सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। अध्यापकों की नियुक्ति के संवैधानिक अधिकार पंचायतों से वापस लेने का सुझाव भी आया। बैठक में अध्यापक नेता आरिफ अंजुम, भरत पटेल, जगदीश यादव, मनोहर दुबे, राकेश नायक, संदर्भ सिंह बघेल सहित अन्य उपस्थित थे।

नहीं पढ़ाने पर कार्रवाई करें, बेगार पर नहीं

अध्यापक नेताओं ने मुख्यमंत्री से कहा कि अगर हम ठीक से न पढ़ाएं और हमारा रिजल्ट खराब रहे, तो कार्रवाई करें। वर्तमान में 90 से 95 फीसदी मामलों में निलंबन या वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई बेगार (गैर शैक्षणिक कार्य) पर होती है। नेताओं ने कहा कि हमें गैर शैक्षणिक कार्य से पूरी तरह मुक्त कर दें। ताकि सरकारी स्कूल बेहतर परफार्मेंस दे सकें।

एक किमी के दायरे में न खुलें प्राइवेट स्कूल

नेताओं ने कहा कि जैसे एक किमी के दायरे में सरकारी स्कूल नहीं खुल सकते हैं। वैसे ही प्रावधान प्राइवेट स्कूलों के लिए करें। अभी चंद मीटर पर स्कूल खुल जाते हैं। जिससे पढ़ाई का स्तर खराब हो रहा है। जिसका सबसे ज्यादा असर सरकारी स्कूलों पर पड़ रहा है।

चौथी बार निरस्त हुआ कार्यक्रम

शिक्षक सम्मेलन चौथी बार निरस्त हुआ है। राज्य सरकार ने अध्यापकों और शिक्षकों की मांगों का निराकरण करने के लिए 6 दिसंबर 2016 को जंबूरी मैदान में सम्मेलन बुलाया था, लेकिन बाबरी मस्जिद की बरसी के कारण कार्यक्रम निरस्त हो गया। फिर 4 नवंबर-17, 26 नवंबर और फिर 17 दिसंबर को सम्मेलन तय हुआ। उप राष्ट्रपति राजधानी आ रहे हैं। इस वजह से कार्यक्रम स्थगित हो गया। इससे अध्यापक नाराज थे।

अध्यापकों ने रखीं ये मांगें

– 6वें वेतनमान की गणना 15 अक्टूबर 16 के वेतन पत्रक से कराई जाए। क्योंकि 7 जुलाई 17 को जारी पत्रक से कुछ संवर्ग का वेतन कम हो रहा है।

– अनुकंपा नियुक्ति के नियम शिथिल कर अध्यापकों के आश्रितों को प्राथमिकता से नियुक्ति दें।

– बंधन मुक्त तबादला नीति लागू की जाए। पति-पत्नी को 10 किमी के दायरे में पदस्थ करें।

– गुरुजियों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का लाभ दिया जाए।

One thought on “नाराज शिक्षक बोले अब किसी अध्यापक को नहीं बनाना विधायक

  • January 4, 2018 at 10:35 PM
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