अजब गजब: महिला विरोधी वकील के निशाने पर थीं तीन महिला जज और दो डॉक्टर, फिर हुआ ऐसा

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अमेरिका में महिलाओं से नफरत करने वाला 72 वर्षीय सिरफिरे रॉय डेन हॉलांदर ने एक जज पर हमला कर दिया।

न्यूजर्सी की जज एस्थल सलास तो हमले में बच गईं। लेकिन, उनका बीस साल का बेटा मारा गया और पति घायल हैं।

न्यूजर्सी में रविवार को हुए इस हत्याकांड से सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो रॉय का शव किराए की कार में मिला।

पुलिस को उसके पास से हिटलिस्ट मिली है। पुलिस के अनुसार, इस सूची में तीन अन्य जज, दो डॉक्टर समेत दर्जनों निशाने पर थे।

शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि रॉय इससे पहले अपने प्रतिद्वंद्वी वकील मार्क एंगलुसी (52) की भी हत्या कर चुका है।

इसके लिए वह आठ दिन पहले ट्रेन से कैलिफोर्निया पहुंचा था।

जज सेलास और मार्क के नाम रॉय के पास मिली सूची में भी हैं। वह डिलीवरी बॉय बनकर हत्या को अंजाम देने जाता था।

अपने खिलाफ फैसले से था गुस्सा

 

रॉय ने मैनहट्टन के नाइट क्लबों में लेडिज नाइट्स के विरोध में याचिका दायर की थी। वह महिलाओं को हिंसा से बचाने वाले नियमों के खिलाफ था। यही नहीं कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वीमन स्टडीज को पुरुषों के साथ अन्याय मानता था। हालांकि, अदालत ने उसकी दलील खारिज करते हुए आरोप असंवैधानिक बताए। इस मामले की सुनवाई जज सलास ही कर रही थीं और दूसरे पक्ष के वकील मार्क एंगलुसी थे। इसी घटना से रॉय नाराज था।

 

पुरुष अधिकारों के लिए चलाता था अभियान

रॉय खुद को नारी विरोधी के रूप में परिभाषित करता था। वह पुरुष अधिकारों और उनसे होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाएं दायर करने के लिए जाना जाता है। महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन जहर उगलता था। उसने एक पोस्ट के जरिए महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वकालत की थी। यही नहीं एक पोस्ट में तो उसने यह तक कह दिया था कि महिलाओं को मिसाइल में बांधकर मध्यपूर्व (मिडिल ईस्ट) में गिरा देना चाहिए।

चीफ जज की हत्या की थी योजना

रॉय की सूची में न्यूयॉर्क की चीफ जज जैनेट एम डाईफोर के साथ दो और फेडरल जजों के अलावा मैनहट्टन के स्टेट जज का भी नाम था। इसके अलावा मैनहट्टन के ही दो कैंसर रोग विशेषज्ञ थे जिनमें से एक डॉक्टर ने रॉय का इलाज भी किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसके जीवन में जो लोग भी बाधा बनकर आए उन्हें वो संभवत: खत्म करना चाहता था।

एफबीआई भी सूची देख हैरान

सर्वोच्च जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) भी सूची देख हैरान है। हालांकि, एफबीआई और नयूजर्सी स्थित यूएस एटॉर्नी ऑफिस के अधिकारियों ने बिना निष्कर्ष पर पहुंचे कुछ भी कहने से मना कर दिया है।

 

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