भभूती खाने से दूर होती है खांसी, इसलिए नाम पड़ा खुलखुली माता

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श्योपुर। शहर के पाली रोड़ सात नीमड़ क्षेत्र में खुलखुली माता का मंदिर है। मान्यता है कि माता के दर्शन कर भभूती खाने एवं परिक्रमा देने मात्र से पुरानी से पुरानी खांसी मिट जाती है, इसके अलावा माता निकलने पर माता के दर्शन करने से भी आराम मिलता है। माता मंदिर की स्थापना लगभग 75 साल पहले बंजारा समुदाय के लोगों द्वारा की गई है। आज दूर-दूर से श्रद्घालु माता रानी के दर्शन करने आते हैं।

मंदिर के पुजारी सत्यनारायण गौतम ने बताया कि, सात दशक पूर्व पुरानी चम्बल कॉलोनी के खाली पड़े मैदान में बंजारा समाज के लोग डेरा डालकर रहते थे। उस समय माता की दो पिण्डी जमीन से निकलीं। तब चम्बल कॉलोनी में डेरा डालकर रहने वाले बंजारा समाज के लोगों ने एक पेड़े के नीचे चबूतरा बनाकर माता की स्थापना की तब से माता चमत्कार करने लगी। माता का चमत्कार बच्चों की खांसी ठीक करने के रूप में प्रसिद्घ हुआ।

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तब से माता को खुलखुली माता के नाम से जाना जाता है। मंदिर में शंकर-पार्वती, हनुमान जी की प्रतिमा भी विराजमान है। कॉलोनी क्षेत्र के वर-वधुओं को शादी से पहले शीतला पूजन कराने के लिए खुलखुली माता मंदिर पर ही लाया जाता है। इसके अलावा सावन महीने में शंकर भगवान की पूजा-अर्चना एवं शीतला अष्ठमी पर बासोडा पूजन भी खुलखुली माता मंदिर पर किया जाता है।

कॉलोनी में क्षेत्र में जब भी श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होता है तो खुलखुली माता मंदिर से ही कलश यात्रा भी निकाली जाती है। शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में अष्ठमी के दिन माता का विशेष श्रंगार होता है। इसके अलावा इस दिन कन्या भोज भी कराया जाता है। आज श्योपुर के अलावा, शिवपुरी, मुरैना, ग्वालियर, राजस्थान के ईटावा, खातोली, बांरा, कोटा, झालावाड़ सहित दूर-दूर से भक्तों के माता के दर्शनों के लिए आते हैं। शहर के मैन रोड़ पर मंदिर होने के कारण कॉलेनी क्षेत्र के महिलाए-पुरुष सुबह-शाम बड़ी तादात में दर्शन करने आते हैं।

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