किसानों ने किया नेशनल हाइवे जाम

इटारसी। कृषि उपज मंडी के गेट के सामने से आज पूरे 3 घंटे 45 मिनट नेशनल हाईवे जाम रहा। सड़क के दोनों तरफ सैंकड़ों वाहनों की कतार लग गई थी। किसानों के चक्काजाम आंदोलन को देखते हुए पुलिस से पवारखेड़ा, भोपाल तिराहा, बुदनी, पथरोटा, केसला और सुखतवा के पास ही कुछ वाहनों को रोक दिया था। सुबह 11:15 बजे से ठीक 3 बजे तक जाम लगा रहा। किसानों का कहना है कि व्यापारी उनकी उड़द का दाम दो सौ और पांच सौ रुपए लगा रहे हैं, ऐसे में भावांतर में उनको क्या फायदा मिलना है। किसानों का यह भी आरोप था कि भावांतर योजना के लाभ की अंतिम तिथि 15 दिसंबर होने से व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।

सुबह सवा 11 बजे से 3 बजे तक पूरी तरह से एनएच पर वाहनों के पहिए थमे रहे। इस दौरान एसडीएम हिमांशुचंद्र कुछ देर के लिए किसानों के बीच आए लेकिन वे किसानों को समझा नहीं सके। हालांकि उन्होंने बहुत अधिक कोशिश भी नहीं की और सीधे मंडी के भीतर चले गए और किसानों से कह गए कि भीतर आकर बात करें। किसान नहीं पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार को भेजा, किसान नहीं माने, एसडीओपी आए तो भी किसान नहीं माने। इस बीच जिला प्रशासन लगातार स्थिति की जानकारी लेता रहा। दोपहर बाद 2:35 बजे होशंगाबाद से एडीएम मनोज सरयाम और एएसपी शशांक गर्ग पहुंचे। उन्होंने किसान नेताओं से बात करना चाही, कोई नेता नहीं था। आखिरकार थोड़ी सख्ती के बाद किसानों ने भीतर जाकर बात करना मंजूर किया और ठीक 3 बजे मंडी गेट के सामने से पहली बस का पहिया आगे बढ़ सका।

आंदोलन का नेतृत्व किसी एक के हाथ में नहीं था, सभी अपने-अपने नेता थे और अपनी दलीलें पेश कर रहे थे। किसान कई गुट में बंटे थे। कुछ लोग यदि सड़क से हटने पर राजी हो जाते तो दूसरा गुट शोरगुल शुरु करके रोड पर बैठ जाता। यह सारा ड्रामा लगातार पौने चार घंटे चला है। प्रशासन से बात करने के लिए कोई एक नेता किसी तरह तैयार होता तो शेष किसान उसे अपना नेता नहीं मानते। भीड़ में भारतीय किसान संघ जिंदाबाद के नारे भी लगे, लेकिन किसान नेता हरपाल सिंह सोलंकी की बात भी किसानों ने नहीं रखी। वे प्रशासन से बात करके बाहर आए और किसानों को मंडी परिसर में चलकर नीलामी शुरु कराने को कहा तो किसान मुकर गए और सोलंकी को अपना नेता मानने से इनकार कर दिया। इधर एक और किसान नेता मधु पटेल भी एक हिस्से में किसानों के साथ नारेबाजी करते रहे। प्रशासन ने उनसे भी बात की, लेकिन कुछ किसानों ने उनको भी दरकिनार कर दिया। इस तरह प्रशासन के सामने समस्या यह आ रही थी कि आखिर बात किससे करे।
बारात की बस रोकी, पुलिस की सख्ती से जाने दी

लगातार पौने चार घंटे चले किसानों के आंदोलन से सबसे अधिक परेशान बसों में बैठे छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं रहीं। तेज धूप और प्यास से उनका हाल बेहाल रहा। बच्चे भूख से तपड़ते रहे तो इस दौरान किसानों ने ग्वालियर से बैतूल जा रही एक बारात भी रोक ली। बारातियों की बस से उतरकर दूल्हे ने किसानों से निकल जाने देने का अनुरोध किया, लेकिन वे नहीं माने। आखिरकार पुलिस ने सख्ती दिखाई तो फिर बस को जाने दिया। किसान और उनकी बीच मौजूद शरारती तत्वों ने बाइक सवारों को भी नहीं छोड़ा। एक स्टुडेंट को होशंगाबाद पेपर देने जाना था, उसकी बाइक उसके सहित उठाकर एक तरफ कर दी। जो लोग ऐसा कर रहे थे, वे नशे में थे। तहसीलदार और एसडीओपी नेे समस्या का समाधान करना चाहा। किसान न तो तहसीलदार की बात मान रहे थे और ना ही वे एसडीओपी की बात सुनने को तैयार थे। ऐसे में एसडीएम को आगे आकर किसानों से बात करनी थी, लेकिन वे मंडी के भीतर व्यापारियों की बैठक में बिजी रहे, किसानों को मंडी परिसर के भीतर बातचीत के लिए बुलाते रहे। सड़क पर किसानों से बात करने को किसी भी स्थिति में वे भी तैयार नहीं थे। आखिरकार एसडीएम और एएसपी ने सड़क पर ही किसानों से बात कर जाम खुलवाया।

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