तो यहां फंसा था मंत्रिमंडल का पेंच, ऐसे निकला हल

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भोपाल, (आशीष शुक्ला) । मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर चल रही माथापच्ची पर अब शायद हल निकाल लिया गया है दरअसल यह मामला फंसा कहां था यह जानना जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आये कांग्रेस के 19 विधायक को मंत्री बनाना या कहीं पर एडजस्ट करने की बात तो तय थी लेकिन इसमे अचानक बिसाहू लाल सिंह के अलावा 2 विधायक भी शामिल हो गए जो सीधे भाजपा के सम्पर्क में थे।

इन 3 विधायकों को मिलाकर सिंधिया कोटे में 22 विधायक हो गए थे। भाजपा सभी 22 विधायकों को सिंधिया कोटे के मान कर चल रही थी, किंतु दिल्ली में जब सिंधिया से मुख्यमंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठों से चर्चा हुई तो सिंधिया ने साफ किया कि 19 विधायकों को तो उनके कोटे के माना जाए पर उन 3 विधायकों को नहीं जो सीधे भाजपा के सम्पर्क में थे। बस यहीं पर पेंच फंसा था।

क्योंकि भाजपा ने इन 3 विधायकों को भी आश्वस्त किया था कि उन्हें भी एडजस्ट किया जाएगा, मगर यह सिंधिया को बतौर अपने कोटे से पद दिया जाना कुछ सही नजर नहीं आ रहा था।

अंत मे बात यही बनी की बिसाहु लाल सहित जिन तीन विधायक ने सीधे भाजपा की सदस्यता ली और विधायक पद से इस्तीफा दिया वह सिंधिया कोटे की जगह भाजपा कोटे के का माना जायेगा।

अब इन तीन विधायकों को भाजपा किस तरह एडजस्ट करती है यह अगर कल मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो साफ हो जाएगा। माना जा रहा है कि इसमे से एक को मंत्री बाकी दो को किसी अन्य स्थान पर बीजेपी एडजस्ट करेगी। इसकी हरी झंडी भी केंद्रीय नेतृत्व से मिल गई है।

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