असंतुष्ट विधायकों को एडजस्ट करने सहकारिता नियमों में संशोधन करेगी MP सरकार

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Bhopal: मध्यप्रदेश में कोरोना संकटकाल के बीच भी राजनैतिक सरगर्मी बनी हुई है, उपचुनाव के पहले विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए सहकारिता अधिनियम में संशोधन करने की तैयारी में है. विधानसभा सत्र में ही संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है.

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान मंत्रीमंडल विस्तार की तैयारी में है, लेकिन दावेदारों की सूची बहुत लम्बी है, हर विधायक को मंत्री बनने की चाहत है, खासतौर पर उनमें जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए है. ऐसे में सभी को खुश करना सीएम शिवराजसिंह चौहान के बस में नहीं है तो उन्हे दूसरे रास्ते से सरकार का हिस्सा बनाने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी को नाराजगी न हो.

सरकार इसके लिए मध्यप्रदेश सहकारिता अधिनियम में संशोधन कर सांसदो व विधायकों को शीर्ष सहकारी संस्थाओं में प्रशासक बनाने की तैयारी कर रही है, आने वाले विधानसभा सत्र में संशोधित विधेयक पेश किया जा सकता है, इस विधेयक के जरिए सरकार एक बार फिर सहकारी संस्थाओं में शासन की जिम्मेदारी बढ़ाने जा रही है.

अधिनियम में संशोधन के बाद विधायकों को राज्य सहकारी बैंक, राज्य सहकारी विपणन संघ, राज्य लघु वनोपज संघ, मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ, राज्य सहकारी बीज उत्पादक व विपणन संघ, सहकारी आवास संघ, सहकारी संघ, सहकारी उपभोक्ता संघ, जिला सहकारी बैंक, दुग्ध संघ में प्रशासक बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा.

गौरतलब है कि पूर्व की कमलनाथ सरकार में भी असंतुष्टों को साधने के लिए कवायद ही चलती रही, लेकिन पूर्व सीएम इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा पाए, कोई भी नियुक्तियां नहीें की गई, जिसके चलते विधायक असंतुष्ट रहे, उनका इंतजार खत्म नहीं हो पाया और सरकार चली गई.

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