रथयात्रा की सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त अनुमति इधर कटनी में जगन्नाथ मंदिर के आसमान पर दिखा सुंदर नजारा

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कटनी, पुरी। जहां एक तरफ पुरी की रथयात्रा यात्रा को सुप्री कोर्ट से हरी झंडी मिली तो इधर कटनी में भगवान जगन्नाथ के मंदिर के आसमान पर इंद्र धनुष का सुंदर नजारा न सिर्फ चर्चा का विषय बना वरन आस्था के सागर में हिलोरे मारती श्रद्धालुओं के मन की लहर ने इसे अलग अलग मायनों से निहारा।

दरअसल शाम को कटनी के जगन्नाथ चौक में जगन्नाथ मंदिर के ठीक ऊपर इन्द्र धनुष की ऐसी छाया नजर आई जैसे मानों प्रकृति ने भगवान जगन्नाथ का सुंदर श्रंगार कर दिया हो।

उधर कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से पुरी रथ यात्रा पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गई. इस मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोवडे ने तीन जजों की बेंच गठित की. इस बेंच में सीजेआई एसए बोवडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी शामिल रहे.

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है. कोरोना के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ रथयात्रा की इजाजत दी है. कोर्ट ने कहा कि प्लेग महामारी के दौरान भी रथ यात्रा सीमित नियमों और श्रद्धालुओं के बीच हुई थी.

बहस की शुरुआत करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि यात्रा की अनुमति दी जानी चाहिए. किसी भी मुद्दे से समझौता नहीं किया गया है और लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है. इस पर CJI ने कहा कि UOI को रथयात्रा का संचालन क्यों करना चाहिए.

मेहता ने कहा कि शंकराचार्य, पुरी के गजपति और जगन्नाथ मंदिर समिति से सलाह कर यात्रा की इजाजत दी जा सकती है. केंद्र सरकार भी यही चाहती है कि कम से कम आवश्यक लोगों के जरिए यात्रा की रस्म निभाई जा सकती है.

इस पर CJI ने कहा कि शंकराचार्य को क्यों शामिल किया जा रहा है? पहले से ट्रस्ट और मंदिर कमेटी ही आयोजित करती है तो शंकराचार्य को सरकार क्यों शामिल कर रही है? वहीं, मेहता बोले- नहीं, हम तो मशविरा की बात कर रहे हैं. वो धार्मिक सर्वोच्च गुरु हैं.

इसी बेंच ने पहले आदेश जारी किया था. सीजेआई एसए बोबडे इस समय अपने गृह जिले नागपुर में हैं. वहां उनके घर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. उसके बाद सुनवाई होगी.

मेहता ने कहा कि शंकराचार्य, पुरी के गजपति और जगन्नाथ मंदिर समिति से सलाह कर यात्रा की इजाजत दी जा सकती है. केंद्र सरकार भी यही चाहती है कि कम से कम आवश्यक लोगों के जरिए यात्रा की रस्म निभाई जा सकती है.

इस पर CJI ने कहा कि शंकराचार्य को क्यों शामिल किया जा रहा है? पहले से ट्रस्ट और मंदिर कमेटी ही आयोजित करती है तो शंकराचार्य को सरकार क्यों शामिल कर रही है? वहीं, मेहता बोले- नहीं, हम तो मशविरा की बात कर रहे हैं. वो धार्मिक सर्वोच्च गुरु हैं.

वहीं, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि कर्फ्यू लगा दिया जाय. रथ को सेवायत या पुलिसकर्मी खींचें, जो कोविड निगेटिव हों. रणजीत कुमार याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ढाई हजार पंडे मंदिर व्यवस्था से जुड़े हैं. सबको शामिल करने से और दिक्कत अव्यवस्था बढ़ेगी.

इस पर सीजे सीजेआई ने कहा कि हमें पता है. ये सब माइक्रो मैनेजमेंट राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. केंद्र की गाइडलाइन के प्रावधानों का पालन करते हुए जनस्वास्थ्य के हित मुताबिक व्यवस्था हो.

वहीं, तुषार मेहता ने कहा कि गाइडलाइन के मुताबिक व्यवस्था होगी. फिर सीजेआई ने कहा कि आप कौन सी गाइडलाइन की बात कर रहे हैं? मेहता ने कहा कि जनता की सेहत को लेकर गाइडलाइन का पालन होगा.

रथयात्रा के पक्ष में केंद्र-ओडिशा सरकार

इससे पहले जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच के सामने केस को मेंशन किया गया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केवल वे लोग जिनका कोविड टेस्ट नेगेटिव आया है और भगवान जगन्नाथ मंदिर में सेवायत के रूप में काम कर रहे हैं, वो अनुष्ठान का हिस्सा हो सकते हैं.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सदियों से चली आ रही एक रस्म को बाधित नहीं किया जाना चाहिए. वहीं, ओडिशा सरकार ने कहा कि जन भागीदारी के बिना रथ यात्रा आयोजित की जा सकती है. केंद्र ने कहा कि हालात को देखते हुए कदम उठाए जा सकते हैं. राज्य सरकार यात्रा के दौरान कर्फ्यू लगा सकती है ताकि लोग सड़कों पर ना उतर पाएं.

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह करोड़ों के आस्था की बात है. अगर भगवान जगन्नाथ कल नहीं आएंगे, तो वे परंपराओं के अनुसार 12 साल तक नहीं आ सकते हैं. श्री जगदगुरू आदिशंकराचार्य द्वारा तय किए गए अनुष्ठानों में वो सभी सेवायत भाग ले सकते हैं, जिनका कोरोना टेस्ट निगेटिव है. लोग टीवी पर लाइव टेलीकास्ट देख सकते हैं.

सुनवाई के दौरान याचिककर्ता के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अगर सरकार पूरे एहतियात के साथ रथयात्रा आयोजित करे तो उनको कोई आपत्ति नहीं. इस पर कोर्ट ने आदेश जारी करने के लिए समय लिया. इसके बाद सीजेआई एसए बोवडे ने तीन सदस्यीय बेंच का गठन किया है, जो मामले की सुनवाई करेगी.

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