MP Assembly : विधानसभा में बिना चर्चा होगा विभागों का बजट पारित

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विपक्ष कटौती प्रस्ताव रखेगा तो भी इस पर चर्चा होने की संभावना नहीं है। दरअसल, सत्र में बजट के अलावा आधा दर्जन से ज्यादा अन्य संशोधन विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनका पारित होना जरूरी है। मानसून सत्र के दौरान सरकार का सबसे महत्वपूर्ण काम वर्ष 2020-21 के लिए बजट पारित कराना होगा।

कोरोना की वजह से बजट सत्र पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए सरकार को एक लाख 66 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेखानुदान अध्यादेश लाना पड़ा था। इसकी अवधि 31 जुलाई तक है। इसके पहले विनियोग और वित्त विधेयक सदन से पारित करवाकर राज्यपाल की अनुमति लेकर अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित करनी होगी। वित्त विभाग इसी हिसाब से तैयारी कर रहा है।

 

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। विभागों से वित्त मंत्री के भाषण में शामिल किए जाने वाले बिंदु मंगाए जा चुके हैं। मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए नए प्रस्ताव भी सीमित संख्या में ही शामिल किए जाएंगे। उधर, विधानसभा सत्र की अवधि। (20 से 24 जुलाई) को देखते हुए बजट पर तीन दिन की सामान्य चर्चा नहीं होगी।

सूत्रों का कहना है कि कुछ घंटे में सामान्य चर्चा को पूरा करवाकर विभागों की अनुदान मांगों को एक साथ प्रस्तुत कर दिया जाएगा। इससे ज्यादातर मांगों पर चर्चा ही नहीं हो पाएगी। सत्र के दौरान कृषि उपज मंडी अधिनियम, श्रम कानून, नगर पालिक और पंचायतराज अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव रखे जाएंगे। केंद्रीय सहायता पर निर्भर करेगा बजट का आकार बताया जा रहा है कि राज्य के करों में आई कमी की पूर्ति वित्तीय वर्ष की बाकी अवधि में पूरी होने की संभावना नहीं है।

 

सूत्रों के मुताबिक लॉकडाउन के कारण करीब 26 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान सरकार को हो चुका है। पेट्रोल और डीजल पर एक-एक रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर लगाकर कुछ नुकसान की भरपाई की कोशिश की गई है, लेकिन इससे भी सालभर में करीब 570 करोड़ रुपये की आय ही होगी। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बजट का आकार केंद्रीय सहायता पर निर्भर करेगा। राज्यों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं में सहायता की राशि बढ़ाई है।

 

नई योजनाएं भी शुरू हुई हैं। राज्य सरकार की कोशिश भी है कि अधिक से अधिक केंद्रीय योजनाओं का उपयोग कर राज्य के बजट पर भार कम किया जाए। 45 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज लेने की सीमा से मिली राहत कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से बने हालात को देखते हुए केंद्र सरकार प्रदेश को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) का दो प्रतिशत अतिरिक्त कर्ज लेने की छूट दी है।

इससे सालभर में 18 हजार 983 करोड़ रुपये जुटाए जा सकेंगे। इसमें चार हजार 746 करोड़ रुपये का कर्ज बिना शर्त लिया जा सकेगा। वहीं, 14 हजार 237 करोड़ रुपये हासिल करने के लिए कुछ सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। प्रदेश सरकार ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। कर्ज लेने की अतिरिक्त छूट मिलने से प्रदेश सरकार अब सालभर में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले सकेगी।

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