निजी बिजली घरों को फायदा पहुंचाने सरकारी बिजली उत्पादन किया कम

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जबलपुर। मई माह में में वैसे ही लॉकडाउन की वजह से डिमांड कम थी। ऐसे में भी जरूरत की बिजली जनरेटिंग कंपनी की माध्यम से नहीं मिलने से निजी पावर प्लांट से बिजली लेनी पड़ी।

एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने आरोप लगाया कि निजी बिजली घरों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी कंपनी से बिजली उत्पादन कम किया गया है।

इससे करोड़ों रुपये का नुकसान कंपनी को उठाना पड़ा है। प्रदेश सरकार का उपक्रम मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी का बिजली उत्पादन क्षमता से आधा भी नहीं है। पिछले दिनों प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय दुबे ने विद्युत इकाइयों को फुल लोड पर चलाने की नसीहत दी है।

अकेले मई 2020 में कंपनी ने औसत बिजली उत्पादन 41 फीसद तक रहा। थर्मल पावर प्लांट में उत्पादन कमजोर रहा।

इस वजह से प्रदेश को रोशन करने के लिए निजी पावर प्लांट से अतिरिक्त जरूरत की बिजली खरीदनी पड़ी।

इसमें सतपुड़ा ताप गृह के दो और तीन नंबर की बिजली इकाई से शून्य उत्पादन हुआ है। वहीं सिंगाजी ताप गृह क्रमांक दो सो भी नाम मात्र का उत्पादन किया गया। उक्त आरोप सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने लगाए हैं।

बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने दावा किया कि लॉकडाउन की वजह से बिजली की खपत मई माह में 40 करोड़ यूनिट घटी है।

वर्ष 2019 मई माह में 649 करोड़ यूनिट की खपत हुई थी। वहीं मई 2020 में खपत 609 करोड़ यूनिट है।

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