पार्षद का चुनाव लड़ने वालों को 30 दिन में देना होगा खर्च का ब्योरा

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भोपाल । नगरीय निकायों के पार्षद के चुनाव में धनबल का उपयोग रोकने के लिए अधिकतम व्यय सीमा तय होने के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग ने खर्च का ब्योरा प्रस्तुत करने के नियम बना दिए हैं। इसके तहत चुनाव की तारीख से 30 दिन के भीतर प्रत्याशी या उसके अधिकृत एजेंट को जिला निर्वाचन अधिकारी के पास व्यय लेखा दाखिल करना होगा। गलत खर्च बताने पर चुनाव निरस्त करने के साथ संबंधित को अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है। प्रदेश में अभी तक पार्षदों के लिए चुनाव खर्च की सीमा नहीं थी।

कमल नाथ सरकार ने महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाताओं से कराने की जगह पार्षदों के माध्यम से चुनने का प्रावधान किया था। इस स्थिति में पार्षद का चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो गया था। इसमें धनबल के इस्तेमाल की आशंका भी थी। इसके मद्देनजर सरकार ने पार्षदों के चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने खर्च का ब्योरा प्रत्याशियों से लेने के लिए निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण एवं प्रस्तुति) नियम 2020 बनाए हैं।

इसके तहत प्रत्याशी को खर्च की गई राशि का स्रोत, सार्वजनिक सभा, रैली, जुलूस, प्रचार समाग्री, केबल नेटवर्क, थोक एसएमएस या इंटरनेट, सोशल मीडिया के जरिए किए प्रचार, वाहन, कार्यकर्ता और एजेंट पर खर्च, चुनाव अभियान में लगाई स्वयं की निधि, पार्टियों से प्राप्त नकदी, चेक, कर्ज, उपहार, दान सहित अन्य माध्यम से मिली राशि का पूरा विवरण देना होगा। आयोग के अधिकारियों ने बताया कि खर्च का ब्योरा समय पर नहीं देने की स्थिति में नोटिस देकर कार्रवाई करने का प्रावधान है।

पार्षद के लिए कितनी है व्यय सीमा

निकाय- जनसंख्या- व्यय की अधिकतम सीमा नगर निगम दस लाख से अधिक – 8.75 लाख रुपये दस लाख से कम – 3.75 लाख रुपये नगर पालिका – एक लाख से अधिक – 2.5 लाख रुपये 50 हजार से एक लाख – 1.5 लाख रुपये 50 हजार से कम -एक लाख नगर परिषद 75 हजार रुपये

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