राज्यमंत्री संजय पाठक सहित सभी 18 लोग दोषमुक्त

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कटनी।  विजयराघवगढ़ न्यायालय का अहम फैसला,2008 में अस्पताल भवन के लोकार्पण के दौरान हुए विवाद के बाद चल रहा था केस

विजयराघवगढ़ के राजा सरयूप्रसाद शासकीय अस्पताल के वर्ष 2008 में उद्घाटन के दौरान हुए विवाद को लेकर चल रहे प्रकरण में विजयराघवगढ़ न्यायालय के माननीय न्यायाधीश अति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री डी आर अहिरवार ने प्रदेश शासन के राज्यमंत्री संजय सत्येंद्र पाठक सहित 18 लोगों को आज दोषमुक्त कर दिया। पूर्व केबिनेट मंत्री सत्येंद्र पाठक, राज्यमंत्री संजय पाठक सहित अन्य लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने के जो आरोप लगाए गए थे, अभियोजन पक्ष कोर्ट में उन आरोपों को साबित नही कर पाया। यह मामला तब का है जब संजय पाठक कांग्रेस में थे। अस्पताल भवन का उद्घाटन करने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अजय विशनोई विजयराघवगढ़ पहुंचे थे। क्षेत्र के लोगों ने आधे अधूरे अस्पताल का लोकार्पण करने का विरोध किया था। इस दौरान हुए विवाद के बाद पुलिस ने श्री पाठक सहित अन्य लोगों के विरुद्ध मामले दर्ज किये थे। यह मामला तब से न्यायालय में चल रहा था। इसमें कई लोगों के बयान भी हुए थे। राज्यमंत्री संजय सत्येंद्र पाठक की ओर से अधिवक्ता नूर मोहम्मद सिद्दीकी ने पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष ने जो आरोप लगाए थे उन आरोपों को वे साबित नही कर पाए। माननीय न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला देते हुए राज्यमंत्री संजय पाठक सहित सभी 18 लोगों को दोषमुक्त कर दिया।

यह न्याय की जीत- संजय पाठक

फैसले के फौरन बाद मीडिया से बात करते हुए राज्यमंत्री संजय पाठक ने कहा कि इस फैसले से न्यायपालिका के प्रति भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है। माननीय न्यायालय से गरीब, बेसहारा मरीजों को न्याय मिला है। यह न्याय और सत्य की जीत है। श्री पाठक ने कहा कि न्यायालय में  वरिष्ठ और अनुभवी अधिवक्ता नूर मोहम्मद सिद्दीकी ने तार्किक ढंग से जिरह के दौरान पक्ष रखा, जिस पर माननीय न्यायाधीश ने गौर किया। उन्होंने कहा मेरा सम्मान और विशवास न्यायपालिका पर और मजबूत हुआ है।

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