लॉकडाउन: घर से बाहर निकलने पर भाई ने भाई की हत्या की; भूखा मजदूर 135 किमी पैदल चलकर घर पहुंचा

मुंबई. कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लगाया गया लॉकडाउन अब लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। इसका असर रिश्तों पर भी पड़ रहा है। उधर, बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां छूट गई हैं। खासतौर पर मजदूरी करने वाले ज्यादा परेशान हैं। दो वक्त की रोटी जुटाना भी इनके लिए मुश्किल हो गया है। गुरुवार को ऐसे ही 2 मामले सामने आए। लॉकडाउन में मना करने के बावजूद घर से निकलने पर भाई ने भाई को मार डाला। वहीं, 150 किलोमीटर दूर अपने घर जाने के लिए एक मजदूर भूखा पैदल निकल पड़ा।

पहला मामला मुंबई से: नौकरी छूटने पर भाई के घर आया था, मिली मौत
कोरोना के चलते देश में मर्डर का यह पहला मामला है। मुंबई के कांदिवली ईस्ट में रहने वाले 28 साल के राजेश ठाकुर ने 21 साल के अपने छोटे भाई दुर्गेश को मार डाला। पुलिस के मुताबिक, राजेश ने उसे लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने के लिए मना किया था। इसके बावजूद वह घर से निकला था। घटना बुधवार की है। राजेश अपनी पत्नी के साथ रहता था। जबकि दुर्गेश पुणे में वेटर का काम करता था। लॉकडाउन के चलते एक हफ्ते पहले की उसकी नौकरी चली गई थी। वह भी मुंबई में राजेश के पास आ गया। बुधवार से लॉकडाउन हुआ, तो राजेश ने उसे घर से बाहर निकलने से मना किया। इसके बावजूद दुर्गेश बाहर निकल पड़ा। इससे दोनों के बीच झगड़ा हुआ। राजेश ने पैन (तवे) से दुर्गेश के सिर पर हमला कर दिया। अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर लिया है।

दूसरा मामला नागपुर से: भूखा मजदूर दो दिन पैदल चलकर घर पहुंचा
देशभर में लॉकडाउन के दौरान बस और ट्रेन सेवा पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसका सबसे ज्यादा असर कामगार और मजदूरों पर पड़ा है। खासकर उन पर जो अपने परिवार से दूर दूसरे शहरों में हैं। कई मजदूरों की नौकरी छूट गई है। इससे बड़ी संख्या में ये मुंबई, दिल्ली, पुणे से सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने-अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं। कुछ ऐसा ही 26 साल के मजदूर नरेंद्र शेलके के साथ हुआ। नरेंद्र ने भूखे रहकर 135 किमी की यात्रा पूरी की। वह महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित जम्भ गांव का रहने वाला है। नागपुर में मजदूरी करता था। यहां से उसके गांव की दूरी 150 किलोमीटर है। लॉकडाउन से नौकरी छूटी तो वह परेशान हो गया। खाने को भी कुछ नहीं था तो वह भूखा ही पैदल अपने गांव के लिए निकल पड़ा। बुधवार रात वह नागपुर से लगभग 135 किमी दूर एक खाली कैंप में पहुंचा, तो पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू कर दी। इस पर उसने बताया कि वह अपने घर तक पहुंचने के लिए पिछले दो दिनों से चल रहा है। पुलिसकर्मियों ने उसे तत्‍काल सिंधेवाही के ग्रामीण अस्‍पताल में भर्ती कराया। मेडिकल चेकअप के बाद उसे एक लंच बॉक्स दिया और फिर गाड़ी का इंतजाम करवाकर उसे घर भिजवाया। जहां उसे 14 दिनों के लिए होम क्वारैंटाइन में रखा गया है।