Loksabha लोकसभा में बोलीं BJP भाजपा सांसद- मुंहासे के उपचार के लिए लगाती हूं आयुर्वेदिक टूथपेस्ट Toothpaste

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नई दिल्ली। लोकसभा ने गुरूवार को ‘‘आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक 2020’’ को मंजूरी दी जिसमें गुजरात (त्रह्वद्भड्डह्म्ड्डह्ल) के एक आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में घोषित करने का प्रावधान है

विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद डॉ प्रीतम मुंडे (ष्ठह्म्. क्कह्म्द्बह्लड्डद्व रूह्वठ्ठस्रद्ग) ने कहा कि वह मुंहासे के उपचार के लिये आयुर्वेदिक टूथपेस्ट का उपयोग करती हैं क्योंकि इसमें लौंग का तेल होता है. मुंडे ने कहा कि मुंहासे के उपचार के लिये वह एलोपैथी क्रीम का उपयोग नहीं करती हैं

सांसद ने बताया इसका कारण
पेशे से त्वचारोग विशेषज्ञ एवं महाराष्ट्र के बीड क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली मुंडे ने कहा, ‘‘मैं जानती हूं कि मेरे डॉक्टर मित्र इसकी आलोचना करेंगे लेकिन मुंहासे के उपचार के लिये मैं टूथपेस्ट का उपयोग करती हूं क्योंकि इसमें लौंग का तेल होता है.’’ मुंडे ने कहा कि आयुर्वेद हमारी परवरिश का हिस्सा रहा है और हमारे घरों में छोटी-छोटी चीजों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का उपयोग होता रहा है. मोदी सरकार के दौरान आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को काफी बढ़ावा मिला है.

मुंडे ने अपने क्षेत्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेद अस्पताल खोलने की मांग की

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यह है विधेयक का प्रावधान
‘आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक 2020’ में आयुर्वेद और संबद्ध शाखाओं में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता के लिये जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में घोषित करने का प्रावधान है. जामनगर स्थित इस संस्थान की स्थापना 1952 में की गई थी. इसके बाद वहां स्नातकोत्तर संकाय स्थापित किया गया. अभी वहां आयुर्वेद पर एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान स्थापित किया जा रहा है

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान का राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में उन्नयन किया जायेगा ताकि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुसार आयुर्वेद के विभिन्न पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाए एवं इस संकाय में शिक्षा के मानकों को उन्नत करने हेतु स्वायत्तता प्रदान की जाए

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देश के 102 अस्पतालों में इसे लेकर हो रहा काम
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि इसके माध्यम से आयुर्वेद के क्षेत्र में गहन अध्ययन और अनुसंधान करना सुगम होगा. उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी आदि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के तहत इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में 102 अस्पतालों को लेकर काम हो रहा है. नाइक ने सांसदों से अपील की कि वे अपने अपने क्षेत्रों में इस प्रकार के अस्पताल खुलवाने के लिए प्रस्ताव भेजें और सरकार उन पर सकारात्मक तरीके से जवाब देगी. उन्होंने साथ ही बताया कि आयुष चिकित्सा के तहत इलाज कराने वाले लोगों को बीमा सुरक्षा मुहैया कराने के लिए 27 बीमा कंपनियों से बात हुई है.

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कांग्रेस ने जताई चिंता
आयुष मंत्री ने साथ ही बताया कि देश में इस समय 704 आयुष कॉलेज तथा 11 राष्ट्रीय संस्थान काम कर रहे हैं. उन्होंने देश के अन्य हिस्सों खासकर केरल में आयुर्वेदिक संस्थानों की स्थापना संबंधी कुछ सदस्यों के सवालों के जवाब में कहा कि अभी मंत्रालय को अस्तित्व में आए छह साल ही हुए हैं और आने वाले दिनों में देशभर में ऐसे 5 से 10 संस्थान और खोले जाएंगे

आयुर्वेद में शोध के संबंध में कांग्रेस के शशि थरूर और अधीर रंजन चौधरी की चिंताओं पर उन्होंने कहा कि देश में 35 शीर्ष आयुर्वेद शोध संस्थान काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न कालेजों से हर साल 45 हजार आयुर्वेदिक डाक्टर पास हो रहे हैं. मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी.

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