BIG BREAKING: कल तक बहुमत साबित करे कमलनाथ सरकार, सियासी संकट पर सुप्रीम आदेश

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नई दिल्ली। पिछले 18 दिनों से मध्यप्रदेश की राजनीति में तूफान को अन्ततः सर्वोच्च अदालत ने शाांत करते हुये मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार को 1 दिन अर्थात कल बहुमत फ्लोरटेस्ट से गुजरने का आदेश दिया है।

हाथ उठाकर यह बहुमत टेस्ट होगा। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। कल शुक्रवार को एक दिन का सत्र केवल फ्लोरटेस्ट के लिये बुलाया जाएगा। साथ ही उन विधायक को परेशान नहीं किया जाएगा जो इस कार्रवाई में भाग नहीं लेना चाहते। शाम 5 बजे तक पूरी कार्रवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को विधानसभा सभा  पर बहुमत सिद्ध करने को कहा है। 6 घण्टे की लंबी सुनवाई के बाद आदेश आया। कमलनाथ सरकार के लिए आदेश झटका लेकर आया है, जबकि भाजपा के लिए सरकार बनाने का रास्ता साफ होता जा रहा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 16 विधायकों की सदस्यता पर निर्णय लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास सुरक्षित तो माना है लेकिन उनकी उपस्थिति को लेकर साफ कहा कि विधायकों उनकी मर्जी से फैसला लेने के लिए कोई भी बाध्य नहीं कर सकता।

राज्यपाल के मामले में बहुमत सिद्ध करने की चिट्ठी पर दलील दी गई  कि राज्यपाल को ऐसा लगा कि सरकार अल्पमत में है तो उन्होंने पत्र दिया।

यहां बीजेपी की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल को उच्च संवैधानिक अधिकार हैं। जब उन्हें लगा कि सरकार अल्पमत में है तो उनका कर्तव्य है कि वह सरकार से पूछें और बहुमत सिद्ध करने के लिए कहें।

कोर्ट ने बीजेपी से यह भी पूछा कि आप अविश्वास प्रस्ताव क्यों नहीं ला रहे?

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इस पर रोहतगी ने कहा कि आप फ्लोर टेस्ट का अंतरिम आदेश दें विस्तृत फैसला बाद में सुनाएं ताकि हॉर्स ट्रेडिंग न हो सके।

राज्यपाल की तरफ से महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि एमपी में सरकार नियुक्तियां कर रही है इससे चिंता है।

दलीलें जिन्हें पढ़ें

शीर्ष अदालत ने स्पीकर एनपी प्रजापति से पूछा, ‘क्या वे वीडियो लिंक के जरिए बागी विधायकों से बात कर सकते हैं और फिर उनके बारे में फैसला कर सकते हैं?’ इस पर स्पीकर की तरफ से पेश वकील अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- ‘नहीं, ऐसा संभव नहीं है। स्पीकर को मिले विशेषाधिकार को सुप्रीम कोर्ट भी नहीं हटा सकता।’ स्पीकर ने 16 बागी विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लेने के लिए 2 हफ्ते का वक्त मांगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि इतना समय देना सोने की खदान जैसा होगा, इससे हॉर्स ट्रेडिंग बढ़ेगी। फ्लोर टेस्ट कराने की मांग करती याचिका भाजपा ने दाखिल की है। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच सुनवाई कर रही है।

कोर्टरूम में क्या हुआ : स्पीकर ने कहा- कोर्ट ने निर्देश दिए तो संवैधानिक दिक्कतें पैदा होंगी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर : 
बेंच का सुझाव था कि हम बेंगलुरु या कहीं और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सकते हैं ताकि बागी विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पीकर से बात कर सकें। स्पीकर ने इस सुझाव को ठुकरा दिया।

बागी विधायकों के इस्तीफों पर : बेंच ने स्पीकर से पूछा कि बागी विधायकों के इस्तीफे के मामले में क्या कोई जांच हुई है और क्या इस पर कोई फैसला किया गया है? इस पर स्पीकर की ओर से पेश वकील सिंघवी ने कहा कि जब कोर्ट स्पीकर को तय वक्त के अंदर कुछ कदम उठाने के निर्देश देने लग जाए तो इससे संवैधानिक दिक्कतें पैदा होंगी।

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फ्लोर टेस्ट पर : बेंच ने सभी पक्षों से पूछा कि क्या विधायकों के इस्तीफे या उन्हें अयोग्य करार देने के स्पीकर के किसी भी फैसले से फ्लोर टेस्ट पर असर पड़ेगा? संवैधानिक सिद्धातों पर गौर करें तो विधायकों के इस्तीफे या उनकी अयोग्यता का मुद्दा स्पीकर के सामने लंबित रहने से ट्रस्ट वोट पर कोई रोक नहीं लगती। इसलिए कोर्ट को दूसरे पहलू की तरफ देखना होगा कि क्या राज्यपाल ने उन्हें मिली शक्तियों से परे जाकर कोई कदम उठाया है? अगर विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है और इस बीच अगर सरकार बहुमत खो देती है ताे राज्यपाल के पास स्पीकर को विश्वास मत परीक्षण कराने का निर्देश देने का अधिकार है। इस पर स्पीकर ने कहा कि राज्यपाल यह तय नहीं कर सकते कि सरकार के पास बहुमत है या नहीं। यह सदन तय करता है। राज्यपाल को तीन ही अधिकार हैं- सदन का सत्र बुलाएं, सत्र को निलंबित करें या सदन को भंग कर दें।

कमलनाथ पर : राज्यपाल लालजी टंडन की ओर से पेश वकील ने बेंच से कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ एकतरफ बैठे हैं और स्पीकर कोर्ट में राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं।

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कांग्रेस चाहती है कि उपचुनाव होने तक फ्लोर टेस्ट न हो
कांग्रेस ने विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होने तक फ्लोर टेस्ट नहीं कराने की मांग की। भाजपा ने इसका विरोध किया। कोर्ट ने कहा कि 16 बागी विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल हों या नहीं, लेकिन उन्हें बंधक नहीं रखा जा सकता। वहीं, विधायकों ने कहा कि स्पीकर को उनके इस्तीफे मंजूर करने का निर्देश दिया जाए। जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच में कांग्रेस के वकील दुष्यंत दवे, भाजपा के वकील मुकुल रोहतगी, राज्यपाल के वकील तुषार मेहता, स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी और बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने पैरवी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- बागियों को बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता
बुधवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा- हम कैसे तय करें कि विधायकों के हलफनामे मर्जी से दिए गए या नहीं? यह संवैधानिक कोर्ट है। हम संविधान के दायरे में कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। टीवी पर कुछ देखकर तय नहीं कर सकते। 16 बागी विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल हों या नहीं, लेकिन उन्हें बंधक नहीं रखा जा सकता। अब साफ हो चुका है कि वे कोई एक रास्ता चुनेंगे। उन्होंने जो किया उसके लिए स्वतंत्र प्रक्रिया होनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने वकीलों से सलाह मांगी कि कैसे विधानसभा में बेरोकटोक आने-जाने और किसी एक का चयन सुनिश्चित हो

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