MP Political Crisis LIVE: बेंगलुरु में हिरासत से रिहा होने के बाद कमीश्नर से मिलने पहुंचे दिग्विजय

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बेंगलुरु। मध्य प्रदेश में सियासी उठापटक के बीच आज सुबह बेंगलुरु पहुंचे दिग्विजय सिंह और अन्य नेताओं को एहतियातन हिरासत से रिहा कर दिया गया है। इसके बाद वे कमीश्नर ऑफिस पहुंचे हैं। इनके साथ कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार, मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेता सज्जन सिंह वर्मा भी साथ में हैं।

इससे पहले दिग्विजय ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि मुझे कहां ले जाया जा रहा है। मुझे अपने विधायकों से मिलने की अनुमति दी जा रही चाहिए। मैं एक कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं। सरकार भी बचाएंगे और विधायकों को भी वापस लाएंगे।’

बेंगलुरु पहुंचने के बाद दिग्विजय सिंह रामदा होटल के पास धरने पर बैठ गए थे। इसी होटल में कांग्रेस के 21 विधायक हैं। पुलिस ने इसके बाद उन्हें एहतियात को तौर पर हिरासत में ले लिया और उन्हे बेंगलुरु के अमृताहल्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया। दिग्विजय पुलिस स्टेशन में भूख हड़ताल पर बैठ गए। इसे लेकर भाजपा नेता कैलाश विजवर्गीय ने दिगविजय पर तंज कसते हुए ट्वीट किया,’बेंगलुरु में नौटंकी !!! हमारा सौभाग्य है कि ये माननीय राजनीति में हैं। यदि बॉलीवुड में होते तो अमिताभ बच्चन जी को भी मात दे देते!’

 

विधायक ने दिग्विजय को टेलीफोन किया

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कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि दिग्विजय सिंह पार्टी के विधायकों से मिलने आए हैं। एक विधायक ने टेलीफोन के माध्यम से उनसे संपर्क किया और यहां से बाहर निकालने का अनुरोध किया। पुलिस को उन्हें रोकने का कोई अधिकार नहीं है। वह उच्च अधिकारियों से अनुरोध करना चाहता है क्योंकि ये लोग सीएम के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।

सचिन यादव और कांतिलाल भूरिया भी हिरासत में

दिग्विजय के साथ डीके शिवकुमार, सज्जन सिंह वर्मा और कांतिलाल भूरिया भी मौजूद हैं। कांग्रेस नेता सचिन यादव और कांतिलाल भूरिया को भी एहतियातन हिरासत में ले लिया गया। दिग्विजय ने कहा, ‘हमें उनकी वापसी की उम्मीद थी। उनके परिवारों से संदेश आए … मैंने व्यक्तिगत रूप से 5 विधायकों से बात की, उन्होंने कहा कि वे बंदी बना लिए गए हैं। उनके फोन छीन लिया गया है। हर कमरे के सामने पुलिस तैनात है। दिन-रात उनपर नजर रखी जा रही है।’

 

राज्य में भाजपा सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही- डीके शिवकुमार

डीके शिवकुमार ने कहा, ‘राज्य में भाजपा सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। हमारी अपनी राजनीतिक रणनीति है, हम जानते हैं कि स्थिति को कैसे संभालना है। वह यहां अकेला नहीं हैं। मैं यहां हूं। मुझे पता है कि उनका कैसे समर्थन करना है। लेकिन मैं कर्नाटक में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं करना चाहता।’

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विधायकों के फोन छीन लिए गए हैं- दिग्विजय

बेंगलुरु पहुंचने पर दिग्विजय को एयरपोर्ट से लेने डीके शिवकुमार पहुंचे थे। दिग्विजय ने कहा, ‘मैं मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार हूं, 26 मार्च को चुनाव होना है। मेरे विधायकों को यहां रखा गया है, वे मुझसे बात करना चाहते हैं। उनके फोन छीन लिए गए हैं। विधायकों के सुरक्षा को खतरा बताकर पुलिस मुझे उनसे बात नहीं करने दे रही है।’

 

राज्यपाल लालजी टंडन ने एनपी प्रजापति को पत्र लिखा

इससे पहले मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने बुधवार तड़के विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को एक पत्र भेजा। इसमें उन्होंने छह मंत्रियों के इस्तीफे को स्वीकार करने में ‘निष्पक्ष और साहसी’ निर्णय लेने की प्रशंसा की। गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद, सत्तारूढ़ दल के 22 विधायकों ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार संकट में आ गई। इनमें से छह विधायकों के इस्तीफे को स्पीकर ने स्वीकार कर लिए हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट में फ्लोर टेस्ट को लेकर याचिका पर सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट में आज मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई होगी। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को नोटिस जारी किया था। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने मुख्यमंत्री, स्पीकर, विधानसभा के प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश और राज्यपाल को नोटिस जारी किया था।

मंगलवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के दूसरी बार निर्देश के बाद भी मंगलवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ। टंडन ने इससे पहले 16 मार्च को विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अपने अभिभाषण के तुरंत बाद फ्लोर टेस्ट का निर्देश दिया था, लेकिन यह नहीं हुआ। इसी दिन शाम को उन्होंने मंगलवार को बहुमत परीक्षण का निर्देश दिया। इसके बाद भी फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा कि फ्लोर टेस्ट कराना उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। यह स्पीकर का काम है।

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