Loveguru मटुकनाथ-जूली की अजब प्रेम की गजब कहानी में आया नया मोड़

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पटना। अपने से आधी उम्र की छात्रा से प्यार और फिर शादी रचाने वाले लवगुरु प्रोफेसर मटुकनाथ की चर्चा फिर हो रही है और इस बार इस अनोखी लव स्टोरी में नया एंगल आ गया है। मटुकनाथ अपनी बीमार जूली को लाने सात समुंदर पार यानि टोबैगो पहुंच गए हैं और वो अगले सप्ताह अपनी जूली को लेकर पटना पहुंचेंगे। दैनिक जागरण से खास बातचीत में मटुकनाथ ने बताया कि उन्होंने जूली से प्यार किया है और वो उन्हें किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते हैं।

Loveguru मटुकनाथ उन्होंने फोन पर बताया कि उनपर तमाम तरह के इल्जाम लगते रहे कि उन्होंने जूली को धोखा दिया, वो संवेदनहीन इंसान हैं। मटुकनाथ ने कहा कि मैंने हमेशा जूली की बातों का, उसके फैसले का सम्मान किया है और आज भी करता हूं। लोग हमारे प्यार को समझ नहीं सकते, ऐसा रहता तो हम शादी नहीं करते। इतनी तरह की बातें नहीं होतीं।

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उन्होंने टोबैगो से फोन पर बताया कि जूली अब थोड़ी स्वस्थ हैं, बीच में उनकी तबीयत खराब हो गई थी। उन्होंने मुझे संदेश भेजा कि आप आएं और मुझे यहां से वापस ले चलें। इस संदेश को पाकर ही मैं उन्हें लेने सात मार्च को त्रिनिदाद एंड टोबैगो के सेंटगस्टीन पहुंचा हूं। मुझे देखकर जूली बहुत खुश हैं और वो अब पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।

उन्होंने बताया कि हमारा प्रेम छल-प्रपंच पर नहीं टिका है, इन सबसे ऊपर है, जिसे लोग नहीं समझ सकते और तमाम तरह की बातें करते हैं। मटुकनाथ ने कहा कि गृहस्थ जीवन से होकर ही संन्यास तक के जीवन का रास्ता जाता है। इसके विपरीत जूली ने बिना गृहस्थ जीवन जिये संन्यास का रास्ता चुन लिया था। उनके स्वास्थ्य खराब होने की यह सबसे बड़ी वजह रहीं और अब ये जूली ने भी स्वीकार किया है।

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मटुकनाथ ने बताया कि जूली गृहस्थ आश्रम का जीवन जीना चाहती हैं और इस वजह से उन्होंने पटना वापस लाने का मुझे संदेश भेजा था और उनका संदेश मिलते ही मैं सात समुंदर पार आ गया और अब उन्हें यहां से लेकर जाऊंगा।

उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले जूली का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य खराब हो गया था जिसे लेकर मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं हुईं कि मैंने उन्हें छोड़ दिया है। मेरे प्रति बुरा भाव रखने वाले लोगों ने ही वेलेंटाइन डे का दिन चुना और मेरे खिलाफ तमाम तरह की बातें प्रचारित की गईं। अब जब मैं जूली को लेकर वापस आऊंगा तो ये लोग अब क्या कहेंगे, पता नहीं।

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उन्होंने बताया कि मैं जूली और अपने शुभचिंतकों को बताना चाहता हूं कि जूली अब पहले से स्वस्थ हैं,चल-फिर रही हैं। खाना-पीना सामान्य हो चुका है और जल्द ही पटना पहुंचेंगी।

मटुकनाथ ने कहा कि ना मैंने जूली को छोड़ा था और ना ही उन्होंने मुझे। हम दोनों एक दूसरे की निजी स्वतंत्रता के समर्थक थे। जूली के भीतर वैराग्य का भाव 2014 से ही दिखने लगा था, जिसके बाद मैंने जूली को सलाह दी कि वो चाहें तो निश्चिंत भाव से वैराग्य जीवन जी सकती हैं।

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