राज्यपाल लालजी टंडन बोले-अपने आदेश का पालन करवाना मुझे आता है

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भोपाल. कमलनाथ सरकार रहेगी या जाएगी, इस पर गहमागहमी जारी है। सोमवार को विधानसभा सत्र शुरू होने के कुछ देर बाद ही स्पीकर ने सदन की कार्यवाही से 26 मार्च तक स्थगित कर दी। सरकार के इस फैसले से राज्यपाल लालजी टंडन नाराज बताए जा रहे हैं।

वे विधानसभा में बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत करने 9 मिनट की देरी से पहुंचे और पूरा अभिभाषण पढ़े बिना 11 मिनट में राजभवन लौट गए। फ्लोर टेस्ट न कराए जाने पर शिवराज सिंह समेत 106 विधायक राजभवन पहुंचे और राज्यपाल के सामने परेड की। सभी से बात करने के बाद राज्यपाल ने कहा- जब मैंने निर्देश दिए थे तो उसका पालन होना चाहिए था। उन्होंने विधायकों से कहा कि आप निश्चिंत रहिए, जो उचित कार्रवाई होगी, मैं करूंगा। अपने आदेश का पालन करवाना मुझे आता है।

इधर, राज्यपाल के राजभवन आते ही सियासी हलचल बढ़ गई। 20 मिनट बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह वहां पहुंचे। उन्होंने वर्तमान घटनाक्रम पर राज्यपाल से करीब एक घंटे चर्चा की। इसके बाद भाजपा नेता विनय सहस्रबुद्धे और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी राजभवन पहुंचे। उनके साथ भाजपा के सभी विधायक भी बसों में आए। राजभवन के आसपास पुलिस का पहरा है।

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इससे पहले रविवार को सरकार की ओर से विधानसभा की कार्यसूची में केवल अभिभाषण को लिए जाने पर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को तलब किया था। भाजपा ने सरकार पर संवैधानिक नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बताया कि सभी भाजपा विधायकों ने शिकायत कि है कि कमलनाथ सरकार ने राज्यपाल के निर्देशों की अवहेलना और अवमानना की है।

राज्यपाल बोले- लोकतंत्र को बचाना मेरी जिम्मेदारी
राज्यपाल विधायकों से पूछा- स्वेच्छा से आए हैं? इस पर विधायकों ने एक साथ ‘हां’ में जवाब दिया। राज्यपाल ने पूछा- कोई दबाव तो नहीं? विधायकों ने कहा- बिल्कुल नहीं। राज्यपाल ने कहा- अब लोकतंत्र बचाने की जिम्मेदारी मेरी है। आपके अधिकारों का हनन नहीं होगा।’

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शिवराज ने कहा- कमलनाथ सरकार मैदान छोड़कर भाग गई
राजभवन से शिवराज ने कहा- कमलनाथ की सरकार अल्पमत में है। बहुमत खो चुकी है। इसलिए राज्यपाल ने सरकार को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। बहुमत होता तो सरकर को दिक्कत क्या थी? मुख्यमंत्री जानते हैं कि वे अल्पमत में हैं। सरकार डरकर मैदान छोड़कर भाग गई। कांग्रेस के सिर्फ 92 और भाजपा के 106 विधायक हैं। अब ये निश्चित हो गया है कि बहुमत भाजपा के साथ है। हमने राज्यपाल के सामने विधायकों की परेड कराई। सरकार के पास कोई अधिकार नहीं बचा है, इसके बाद भी रोज तबादले किए जा रहे हैं। कमलनाथ को अब कोरोना भी नहीं बचा सकता। राज्यपाल ने कहा है कि वे हमारे हितों की रक्षा करेंगे। हम सर्वोच्च न्यायलय में भी गए हैं।

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कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट कराने से इनकार किया था
इससे पहले राज्यपाल को सोमवार सुबह 10.50 बजे विधानसभा जाने के लिए निकलना था। इस बीच, कमलनाथ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर फ्लोर टेस्ट नहीं कराने की जानकारी दी, इससे वे नाराज हो गए। राज्यपाल 11.08 बजे तक राजभवन से बाहर नहीं निकले। तब कयास लगाए जाने लगे कि राज्यपाल विधानसभा नहीं जाएंगे। बताया जा रहा है राज्यपाल ने संवैधानिक विशेषज्ञों की सलाह ली और विधानसभा जाने को तैयार हुए। इस बीच, यहां सुरक्षा में तैनात पुलिसबल को खाने के पैकेट बांटे गए, उन्होंने भोजन शुरू ही किया था कि इतने में राज्यपाल के वापस आने की सूचना आ गई। सुरक्षाकर्मी खाना बीच में छोड़कर फिर से मुस्तैद हो गए। राज्यपाल विधानसभा से 11.20 बजे राजभवन में प्रवेश कर गए।

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