मध्यप्रदेश में छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर, समझें गणित

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भोपाल। मध्यप्रदेश में चल रही राजनीतिक उठापटक रंगपंचमी के दिन और तीखे मोड़ पर पहुंच गई। पंचमी से एक दिन पहले 13 मार्च को ज्योतिरादित्य के काफिले पर पथराव हुआ जिससे कमलनाथ सरकार के खिलाफ भाजपा ने मोर्चा खोल दिया। रंगपंचमी के दिन विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कांग्रेस के छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। यह सभी कमलनाथ मंत्रिमंडल में शामिल थे। लेकिन छह इस्तीफे स्वीकार होने के बाद सदन में कांग्रेस की सदस्य संख्या 114 से घटकर 108 रह गई है।

अब यदि विधानसभा अध्यक्ष सिंधिया गुट के बाकी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं करते हैं तब भी बहुमत के लिए कांग्रेस को काफी जोर लगाना होगा। एक बार राज्य विधानसभा की दलीय स्थिति पर नजर डालिए।

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मध्यप्रदेश विधानसभा की दलीय स्थिति और बहुमत के लिए आवश्यक सदस्य संख्या

कुल सीटें: 230
खाली सीटें: 2

13 मार्च तक संख्या बल
कांग्रेस: 114
भाजपा: 107
बसपा: 2
सपा: 1
निर्दलीय: 4

14 मार्च के बाद संख्या बल
कांग्रेस: 108
भाजपा: 107
बसपा: 2
सपा: 1
निर्दलीय: 4
(अब बहुमत के लिए 112 संख्या बल चाहिए)

यदि कांग्रेस को बसपा और सपा का समर्थन हासिल रहता है तो भी उसके पास बहुमत के लिए जरूरी 112 की संख्या नहीं है। वहीं भाजपा अपने बूत सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में उसे निर्दलीय विधायकों के साथ ही साथ सपा या बसपा में भी सेंध लगानी होगी।

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होली और रंगपंचमी के बाद 16 मार्च से शुरू हो रहा मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। सोमवार को ही पता चलेगा कि सिंधिया गुट के बाकी विधायकों का भविष्य क्या होगा और इसी से तय होगा कि मध्यप्रदेश की सत्ता किसके पास होगी। श्यामला हिल्स स्थिति मुख्यमंत्री निवास में कमलनाथ अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे या वहां किसी और के नाम की नामपट्टिका लगाई जाएगी

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