अंततः भाजपा के हुए सिंधिया महराज, होली पर चढ़ा भगवा रंग, नड्डा ने दिलाई सदस्यता

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नई दिल्ली। लंबी उहापोह, कयास चर्चाओं के बीच आज अंततः एमपी के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा के राष्ट्रीय दफ्तर में बीजेपी चीफ जेपी नड्डा ने सिंधिया को भाजपा की सदस्यता दिलाई।

इस दौरान वीडी शर्मा, विनय सहस्त्रबुद्धे, भी मौजूद थे, सिंधिया घर से भाजपा नेता जफर इस्लाम के साथ निकले।

कल कांग्रेस छोड़ने के बाद पिछले 24 घण्टे से तमाम कयास लगाए जा रहे थे। कहा जा रहा है कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा भेजेगी फिर उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जाएगा।

सिंधिया ने कहा- भारत का भविष्य मोदी जी के हाथों में सुरक्षित

सिंधिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा किव्यक्ति के जीवन मे दो दिवस महत्वपूर्ण। पहला जब मैंने अपने पूज्य पिता को खोया। दूसरा- जब मैंने नई परिकल्पना के साथ निर्णय लिया। मैंने माना है कि राजनीति भारत माता की सेवा के लक्ष्य के लिए होना चाहिए। मैंने 19 वर्षों में कांग्रेस में रहकर सेवा की। जनसेवा के लक्ष्य की पूर्ति कांग्रेस में रहकर नही हो पा रही थी। आज वो कांग्रेस नही रही जो पहले थी। कांग्रेस वास्तविकता से इनकार करती है। जड़ता का एक जो वातावरण है। उसके साथ सही नेतृत्व को मान्यता न मिलना, दुखद है। 18 माह में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने सपने तोड़े। ऋण माफ नही हुए, मुआवजा नही मिला। आज भी किसानों पर केस लगे। आज किसान त्रस्त है। रोजगार के अवसर नही। भ्रस्टाचार के बड़े अवसर एमपी मे हो चुके। ट्रांसफर माफिया सक्रिय। मैंने सत्य के पथ पर चलकर निर्णय लिया कि मुझे भाजपा में आना चाहिए। मोदी जी, अमित शाह जी और नड्डा जी का आभार।

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कौन हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया, आजादी के पहले ग्वालियर के शाही मराठा सिंधिया राजघराने के वंशज हैं और उनकी दादी दिवंगत राजमाता सिंधिया जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थीं. माधवराव सिंधिया भी अपनी माता के बाद 1971 में जनसंघ में शामिल हो गये थे और साल 1971 के लोकसभा चुनाव में ‘इंदिरा लहर’ के बावजूद मां और पुत्र दोनों अपनी-अपनी सीटों पर विजयी हुए.

 

साल 1980 में माधवराव सिंधिया, इंदिरा गांधी की कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये. कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान उनकी मां को जेल में बंद रखा था. माधवराव की बहनों वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे अपनी मां के पदचिह्नों पर चलते हुए बाद में बीजेपी में शामिल हुईं.

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माधवराव सिंधिया की प्लेन क्रैश में मौत और ज्योतिरादित्य की राजनीति में एंट्री

 

30 सितम्बर 2001 को ग्वालियर राजघराने के उत्तराधिकारी और कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया की उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो गई. सिंधिया उस वक्त कानपुर में एक कार्यक्रम में जा रहे थे. 2001 में उनके निधन के बाद 2002 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतरना पड़ा. अपने पहले ही चुनाव में ज्योतिरादित्य ने जीत हासिल की. इसके बाद वो गुना सीट से लगातार जीतते रहे. 2014 की मोदी लहर में जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सारे दिग्गज नेता चुनाव हार गए थे और 29 में से केवल दो सीटें ही कांग्रेस को मिली थी, उस दौरान भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारी अंतर से जीत दर्ज की थी.

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ज्योतिरादित्य सिंधिया का ऐसा रहा सफर

 

माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया की गिनती कांग्रेस के हाईली एजुकेटेड नेताओं में होती रही है. ज्योतिरादित्य ने दून स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद वो इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन के लिए हावर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. सिंधिया ने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल से एमबीए की डिग्री भी हासिल की है. ज्योतिरादित्य सिंधिया, मनमोहन सिंह की सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे. भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में वो वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री रहे.

 

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