सिंधिया की चुप्पी के पीछे छिपी सियासी साजिश को समझने में कांग्रेस रही नाकामयाब

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नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश की सियासत को घेरे हुए सियासत के बादल अब और गहरे होते नजर आ रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस में मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्यसभा की सीट को लेकर मचे घमासान से कमलनाथ सरकार संकंट मे आ गई। अब जबकि कांग्रेस के कद्दावर नेता सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और उनके नक्शे कदम पर चलते हुए उनके समर्थक विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है तो कमलनाथ सरकार काफी मुश्किल में नजर आ रही है।

सियासत का यह सनसनीखेज ड्रामा उस वक्त शुरू हुआ था जब कांग्रेस और उसको समर्थन दे रहे 8 विधायकों के बागी होने की खबर मिली थी। इसमें चार विधायक हरियाणा में और चार के बैंगलुरु में होने की सूचना थी। उस वक्त बताया जा रहा था कि कुल 14 विधायक कमलनाथ सरकार से नाराज चल रहे हैं। सीएम कमलनाथ को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने ताबड़तोब अपने विश्वस्थ सिपहसालारों को कमान सौंपी । ये सभी विधायक मानेसर के एक होटल में ठहरे हुए थे। जब वहां पर कमलनाथ सरकार के चार मंत्रियों नें बागी विधायकों को छुड़वाने कि कोशिश की तो बीजेपी के एक रसूखदार नेता ने पुलिस को बुलवा लिया।

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इस दौरान दिग्विजय सिंह लगातार भाजपा पर हमला करते रहे, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की चुप्पी के पीछे छिपी सियासी साजिश को समझने में कांग्रेस नाकामयाब रही। पिछले कुछ दिनों से लगातार सिधिया खेमे के विधायक और मंत्री सीएम कमलनाथ की सरकार पर निशाना साध रहे थे। दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह भी सरकार के खिलाफ काफी मुखर होकर आवाज उठा रहे थे। मामूली बहुमत पर टिकी कमलनाथ सरकार में निर्दलीय विधायकों का भी काफी अहम रोल था। इसलिए निर्दलीय भी अब मलाईदार मंत्रालय का मोह पाले बैठे हुए थे।

 

कभी ज्योतिरादितेय सिंधिया सीएम पद के प्रबल दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आने पर कमलनाथ की ताजपोशी की गई। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी मध्य प्रदेश की सियासत में अहम रोल है, जो हमेशा से ज्योतिरादित्य सिंधिया के सियासी दायरे को सीमित करने के पक्ष में रहे हैं। ऐसे में लगातार अपनी उपेक्षा से आहत होकर आखिर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना सियासी रास्ता अलग कर लिया है तो सीएम कमलनाथ के लिए सरकार बचाना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।

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