Jyotiraditya Scindia ऐसा रहा है उनका राजनीतिक सफर, शाम 6 बजे बीजेपी में जाएंगे

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Jyotiraditya Scindia Resigns: मध्यप्रदेश में Congress को बड़ा झटका लगा है और पिछले कुछ दिनों से जारी Political crisis का पटाक्षेप हो गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा 9 मार्च को ही दे दिया था और अब इसे सार्वजनिक किया है। उन्होंने अपना इस्तीफा ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसके बाद अब उनके भाजपा के साथ नई पारी की शुरुआत करने की अटकलें हैं। कहा जा रहा है कि वो PM Modi और Amit Shah से मुलाकात के बाद भाजपा में शामिल हो सकते हैं और राज्यसभा चुनाव लड़ सकते हैं। पिछले दो दिनों में अचानक बदले राजनीतिक घटनाक्रम में प्रदेश कांग्रेस के बड़े और युवा चेहरे Jyotiraditya Scindia को सूत्रधार बताया जा रहा था।

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राजनीतिक सफर की बात करें तो सिंधिया घराने से संबंध रखने के कारण उन्हें राजनीति विरासत में मिली क्योंकि पिता स्व. माधवराव सिंधिया अपने समय के दिग्गज कांग्रेस नेता रहे वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआएं भी राजनीती में सक्रिय हैं। उनके पिता स्व. माधवराव संधिया 9 बार सांसद रहे थे।

शुरुआत में जनसंघ के टिकट से चुनाव लड़ने के बाद वो कांग्रेस में शामिल हो गए। ज्योतिरादित्य ने 2002 में पहली बार पिता के देहांत के बाद उनकी पारंपरिक गुना सीट से चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंचे। 2004 में भी उन्होंने इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की लेकिन 2019 में वो अपनी इस सीट से चुनाव हार गए।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2007 में पहली बार केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में मनमोहन सरकार में जिम्मा संभाला। इसके बाद 2012 में भी वो केंद्रीय राज्य मंत्री रहे। 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश में कोई बड़ा पद देने की बजाय कांग्रेस महासचिव बना दिया। राज्य के विधानसभा चुनाव में संधिया को मुख्यमंत्री का चेहरा माना जा रहा था लेकिन नतीजों के बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए।

वर्ष 1993 में पिता माधवराव भी कांग्रेस से अलग हुए थे!

मध्य प्रदेश में चल रही राजनीतिक अनिश्चितताओं और कांग्रेस में कलह ने, कुछ पुराने संदर्भों को भी फिर से सामयिक बना दिया है। फिलहाल चल रही चर्चाओं में जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ रहे हैं, वैसे ही साल 1993 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया, दिग्विजय सिंह से अलग हो गए थे। उस दौर में माधवराव भी कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इसी के चलते उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया था। बाद में उन्हीं के नेतृत्व में मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस पार्टी बनाई गई, हालांकि कुछ समय बाद माधवराव सिंधिया कांग्रेस में लौट आए थे। ठीक इसी प्रकार 1967 में जब मध्य प्रदेश में डीपी मिश्रा की सरकार थी, तब कांग्रेस में उपेक्षित होकर राजमाता विजयराजे सिंधिया कांग्रेस छोड़कर जनसंघ से जुड़ गई थीं। राजमाता ने जनसंघ के टिकट पर ही गुना लोकसभा सीट से चुनाव भी जीता था।

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