Katni : तोड़ने की बजाय होटल सील कर लौटा माफिया दमन दल

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कटनी। भू-माफिया के खिलाफ प्रदेश भर में एक्शन में आई कमलनाथ सरकार की ताबड़तोड़ कार्रवाई की आंच शहर कटनी में भी महसूस की जा रही है। दो दिन से माधवनगर में पुनर्वास की जमीन पर बनी होटल डरबी को तोड़े जाने की सुगबुगाहट के बीच आज भारी संख्या में पुलिस और प्रशासन का बल जैसे ही सुबह पहुंचा तो माधवनगर के लोगों की भीड़ जमा हो गई।

दो दिन से होटल जमींदोज हो जाने की आशंका को लेकर होटल संचालक के हाथ-पैर फूल रहे हैं तो दूसरी ओर एक दिन की मोहलत को लेकर प्रशासन के अफसर निशाने पर हैं। आखिर किसका फोन आया जो प्रशासन को होटल के संचालक को दिए गए समय में एक दिन का इजाफा करना पड़ा। इसकी गर्त में चर्चाएं तो कई हैं लेकिन आज की कार्रवाई को लेकर सुबह से ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी होटल की वैधानिकता वाले दस्तावेजों को खंगालते रहे और अंततः होटल सील कर वापस लौट आए। फिलहाल माफिया दमन दल तो वापस लौट आया है, लेकिन सवाल अब भी खड़े हैं। क्या होटल गलत तरीके से पुनर्वास की जमीन पर ही बनी? क्या इसकी मिल्कियत साधारण कागजों में ही बदलती रही और क्या पट्टे की रहवासी जमीनों पर व्यवसायिक परिसर खड़े किये जा सकते हैं? इन सवालों का जवाब कार्रवाई की जद में आने वालों को देरसबेर फिर परेशान कर सकता है और प्रशासन को भी इन सवालों के आधार पर सरकार और जनता को संतुष्ट करना पड़ेगा। यह भी साफ है कि यदि होटल डरबी जमींदोज होती है तो फिर माधवनगर में बहुत सारे ऐसे आशियाने हैं जो पुनर्वास की जमीन के छोटे से टुकड़े पर पसरते हुए तन गए थे। सबको अपनी-अपनी आलीशान इमारतों की चिंता सता रही है, शायद इसीलिए प्रशासन की इस कार्रवाई के आगे माधवनगर के रहवासियों की भीड़ सीना तानकर खड़ी हो गई।

ये है होटल की इनसाइड स्टोरी
उधर होटल के संबंध में जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि जिस जमीन पर होटल का निर्माण कराया गया है वह जमीन किसी कन्हैयालाल को रहवासी पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। पैसो की आवश्यकता पड़ने पर कन्हैयालाल ने जमीन का पट्टा कच्ची लिखापढ़ी में जेठानंद बलवानी को बेच दिया था। जिसके बाद जेठानंद बलवानी ने रहवासी पट्टे वाली इस जमीन पर डरबी होटल का निर्माण करा लिया। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस बीच कन्हैयालाल का निधन हो गया और यह रहवासी पट्टा उनकी धर्मपत्नी के नाम हस्तांतरित हो गया लेकिन जमीन पर काबिज लोगों ने कन्हैयालाल की धर्मपत्नी को मृत बताकर इस रहवासी पट्टे को कूटरचित दस्तावेजों से अपने नाम करा लिया। एक जानकारी में सूत्रों ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में डरबी होटल को जेठानंद बलवानी ने उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर के तांगा स्टेण्ड स्थित बाम्बे होटल के संचालक प्रकाश आहूजा को बेच दिया है।प्रदेश के कई शहरों में भूमाफियाओं पर ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच अवैध तरीके से बने भवनों को तोड़ा जा रहा है लेकिन लगता है कटनी में प्रशासन भूमाफियाओं पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।

इसका ताजा उदाहरण आज सुबह माधवनगर में देखने को मिला। सुबह से लाव लस्कर के साथ होटल पर कार्रवाई करने एकत्रित प्रशासनिक, पुलिस व नगर निगम अधिकारियों ने दोपहर बारह बजे के लगभग यह निर्णय लिया कि अभी होटल को तोड़ा नहीं जाएगा बल्कि उसको खाली कराके सील किया जाएगा। जिसके बाद प्रशासन ने होटल संचालक को अंदर से सामान खाली करने एक घंटे की मोहलत और दी। समाचार लिखे जाने तक होटल का सामान खाली किया जा रहा था। समझा जाता है कि सामान खाली होने के बाद अभी होटल को सील कर दिया जाएगा और फिर बाद में किसी भी दिन योजना बनाकर इसे तोड़ भी दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर में समदड़िया कालोनी के सामने स्थित डरबी होटल को खाली करने होटल संचालक को दी गई 24 घंटे की मोहलत आज सुबह समाप्त हो गई। जिसके बाद प्रशासन, पुलिस व नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी आज सुबह होटल पर कार्रवाई करने लाव लस्कर के साथ सक्रिय तो हुए लेकिन इसके पूर्व कार्रवाई के विरोध में भारी संख्या में लोगों की भीड़ होटल के सामने एकत्रित हो गई।

जिसकी वजह से अधिकारियों को माधवनगर थाने में ही रूकना पड़ा। होटल पर कार्रवाई करने अधिकारियों व कर्मचारियों की भारी भीड़ के अलावा दंगाइयों से निपटने वाला वाहन बज्र व फायर ब्रिगेड को भी तैनात किया गया था। उधर माधवनगर वासियों को भी होटल पर कार्रवाई की भनक लग गई और भारी संख्या में लोग होटल के सामने एकत्रित हो गए और कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी करने लगे। गौरतलब है कि 24 दिसंबर को नगर निगम के भवन अनुज्ञा अधिकारी राकेश शर्मा द्वारा माधवनगर निवासी जेठानंद वलवानी के नाम डरबी होटल में नोटिस चस्पा कराया गया था।

जिसमें यह कहा गया था कि पुर्नवास भूमि सीट नंबर दो प्लाट नंबर 290 का अवैध रूप से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। इस प्रयोजन से यहां पर होटल एवं रेस्टारेंट का संचालन हो रहा है। नगर निगम द्वारा जारी आवासी भवन अनुज्ञा कार्यालयीन पत्र क्रमांक 118/भवन अनुज्ञा/2019/16 दिसंबर 2019 को प्रतिसंहरण किया जा चुका है। भवन अनुज्ञा अधिकारी ने भवन को 24 घंटे में खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। पुनर्वास की भूमि का व्यवसायिक उपयोग करने और कार्रवाई संबंधी नगर निगम द्वारा जारी नोटिस के बाद यहां दूसरे निर्माण पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों ने बताया कि माधवनगर में पुनर्वास की भूमि पर मिल और दूसरे व्यवसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं।

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