296 साल बाद आज दुर्लभ सूर्य ग्रहण, अंगूठी जैसा दिखा नजारा, बरतें ये सावधानियां

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नई दिल्ली/वाराणसी/मथुरा। वर्ष 2019 का सूर्य ग्रहण पौष अमावस्या पर गुरुवार की सुबह 8.17 बजे लग रहा है। यह सूर्य ग्रहण 296 साल बाद लग रहा है। यह अंगूठी जैसा सूर्य ग्रहण होगा जिसमें सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह लगेगा। वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष स्वामी पूर्णानंद पुरी महाराज ने कहा कि ऐसा दुर्लभ सूर्यग्रहण 296 साल पहले सात जनवरी 1723 को हुआ था। सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा। चन्द्रमा की छाया सूर्य का 97 प्रतिशत भाग ढकेगी। सूर्य ग्रहण सुबह 8:17 बजे शुरू होगा। 26 दिसंबर को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण के मौके पर ज्यादातर मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों के कपाट खुलेंगे और दोबारा से पूजा अर्चना शुरू होगी।

वलयाकार सूर्य ग्रहण

यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जो भारत समेत ऑस्ट्रेलिया, फिलिपिंस, साउदी अरब और सिंगापुर जैसी जगहों पर देखा जा सकेगा। इससे पहले इस साल 6 जनवरी और 2 जुलाई को आंशिक सूर्यग्रहण लगा था, लेकिन यह इस साल का पूर्ण सूर्यग्रहण है। भारत में सूर्योदय के बाद इस वलयाकार सूर्य ग्रहण को देश के दक्षिणी भाग में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के हिस्सों देखा जा सकेगा जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।

भारत में कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?

ग्रहण की वलयाकार प्रावस्था का संकीर्ण गलियारा देश के दक्षिणी हिस्से में कुछ स्थानों यथा कन्नानोर, कोयंबटूर, कोझीकोड, मदुरई, मंगलोर, ऊटी, तिरुचिरापल्ली इत्यादि से होकर गुजरेगा। भारत में वलयाकार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का करीब 93 फीसदी हिस्सा चांद से ढका रहेगा।

सूर्य ग्रहण के वक्त क्या करें और क्या करने से बचें

  1. ग्रहण काल में खाना-पिना, शोर मचाना या किसी भी प्रकार का शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ आदि नहीं करना चाहिए।

  2. हालांकि, आप इस दौरान गुरु मंत्र का जाप, किसी मंत्र की सिद्धी, रामायण, सुंदरकांड का पाठ, तंत्र सिद्धी आदि कर सकते हैं।

  3. सूतक लगने के बाद से ही गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. ग्रहण काल में सूर्य से पराबैंगनी किरणे निकलती हैं, जो गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक होती हैं।

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4. ग्रहण खत्म होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान कर के शुद्धिकरण कर लेना चाहिए।

  1. सूतक लगने से पहले ही घर में मौजूद खाने की सभी वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल लेने चाहिए।

  2. यदि आपके घर में मंदिर है तो सूतक लगते ही उसके कपाट बंद कर दें या फिर मंदिर को पर्दे से ढक दें।

  3. मान्यता है कि ग्रहण के बाद मन की शुद्धी के लिए दान-पुण्य भी करना चाहिए।

सूर्यग्रहण में छह ग्रह एक साथ होंगे और यह भारत में दिखाई भी देगा


26 दिसंबर को होने वाला सूर्यग्रहण इस बार विशेष परिस्थितियों के साथ होगा। इस दौरान सूर्यग्रहण में छह ग्रह एक साथ होंगे और यह भारत में दिखाई भी देगा।

ज्योतिषचार्या विभोर इंदूसुत का कहना है कि वर्ष 1962 में बहुत बड़ा सूर्यग्रहण हुआ था, जिसमें सात ग्रह एक साथ थे। इस बार छह ग्रह एक साथ हैं केवल एक ग्रह की कमी है। ज्योतिषचार्य विभोर इंदूसुत ने बताया कि 26 दिसंबर को लगभग तीन घंटे सूर्यग्रहण होगा। यह सुबह 8:17 पर शुरू होगा, 9:37 पर ग्रहण का मध्यकाल होगा और 10:57 पर ग्रहण का मोक्ष होगा।

सूतक बारह घंटे पहले ही 25 दिसम्बर की रात 8:17 पर लगगेगा। ये सूर्य ग्रहण धनु राशि और मूल नक्षत्र में बनेगा इसलिए व्यक्तिगत रूप से धनु राशि और मूल नक्षत्र में जन्मे लोगों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव पड़ेगा।

ज्योतिष नजरिये से 26 दिसंबर को होने वाले सूर्य ग्रहण का प्रभाव किसी समान्य सूर्य ग्रहण के मुकाबले बहुत ज्यादा तीव्र होगा क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के समय धनु राशि में एक साथ छह ग्रह (सूर्य, चन्द्रमा, शनि, बुध, बृहस्पति, केतु) का योग बनेगा जिससे इस सूर्यग्रहण का प्रभाव बहुत ज्यादा और लंबे समय तक रहने वाला होगा।

वहीं ज्योतिषाचार्या अनुराधा गोयल ने बताया कि 25 दिसंबर सात बजकर 20 मिनट से सूतक लग जाएगा। जिसके तहत मंदिर के कपाट और पूजा का कोई भी शुभ कार्य नहीं होगा। 26 दिसंबर को सूर्यग्रहण होगा। काले उड़द, मूंग की दाल आटा, आदि का दान करें।

सूर्यग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं ध्यान रखें ये बातें

क्या है ग्रहण सूतक काल ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रणह शुरू होने के 12 घंटे पहले और ग्रहण पूरा होने के 12 घंटे के बाद तक का समय ग्रहण सूतक काल कहलाता है। इस बार सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को है, इसलिए ग्रहण सूतक काल 25 दिसंबर को शुरू हो गया।

ग्रहण तिथि और समय

बुधवार की रात 8:17 बजे से सूतक लग जाएंगे। ग्रहण समाप्त होते ही सूतक खत्म होंगे। ग्रहण के दिन मूल नक्षत्र में चार ग्रह रहेंगे। वहीं, धनु राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु रहेंगे। इन छह ग्रहों पर राहु की पूर्ण दृष्टि भी रहेगी। इनमें दो ग्रह यानी बुध और गुरु अस्त रहेंगे। कर्क, तुला, कुंभ और मीन चार राशि वालों पर ग्रहण शुभ रहेगा।

नए साल 2020 में ग्रहण

10 जनवरी – चंद्र ग्रहण

5 जून – चंद्र ग्रहण

21 जून – सूर्य ग्रहण

5 जुलाई – चंद्र ग्रहण

30 नवंबर -चंद्र ग्रहण

14 दिसंबर – सूर्यग्रह

गर्भवती महिलाओं पर चंद्र ग्रहण का असर

माना जाता है कि किसी भी ग्रहण असर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर होता है। क्योंकि ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा काफी ज्यादा रहती है। ज्योतिषाचार्यों द्वारा ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं होगा। ग्रहण काल के दौरान यदि खाना जरूरी हो तो सिर्फ खानपान की उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनमें सूतक लगने से पहले तुलसी पत्र या कुशा डला गया हो। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान चाकू, छुरी, ब्लेड, कैंची जैसी काटने की किसी भी वस्तु का प्रयोग न करें। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान सुई धागे का प्रयोग भी वर्जित है। ग्रहण काल के दौरान भगवान का नाम लेने के अलावा कोई दूसरा काम न करें।

ग्रहण काल में रखें ये सावधानियां

ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।

  • ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

  • ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।

  • ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। हालांकि चंद्र ग्रहण देखने से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं होता।

  • ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

सूर्य ग्रहण का संपूर्ण काल 2.53 घंटा और ग्रासमान 17.01 होगा

सूर्य के मूल नक्षत्र व धनु राशि पर ग्रहण का स्पर्श सुबह 8.17 बजे, मध्य 9.40 बजे और मोक्ष 11.13 बजे होगा। ग्रहण का संपूर्ण काल 2.53 घंटा और ग्रासमान 17.01 होगा। इससे 12 घंटे पहले बुधवार रात 8.20 बजे सूतक (वेध) लग गया।

नंगी आंखों से न देखे सूर्यग्रहण

ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार ब्रह्मांड में ऊर्जा के प्रमुख स्रोत भगवान सूर्यदेव का धर्म व ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान है। ग्रहराज सूर्य काल गणना के मुख्य घटक तो ज्योतिष की मूल धुरी हैं। इन पर राहु का ग्रसन होने से निकलने वाली ऊर्जा हानिप्रद होती है। इस कारण ही ग्रहण को नंगी आंखों से देखने की मनाही है।

सूर्य ग्रहण में 12 घंटे व चंद्र ग्रहण में नौ घंटे पहले सूतक लगता है

धर्मशास्त्र में कहा गया है सूर्य ग्रहतु नास्नियात् पूर्व याम चतुष्टयम। चंद्रग्रहेतु यामस्ति्रन बाल, वृद्धा, तुरैविना।। अर्थात् सूर्य ग्रहण में 12 घंटे व चंद्र ग्रहण में नौ घंटे पहले सूतक लग जाता है। इसमें बाल, वृद्ध व रोगी को छोड़ अन्य के लिए भोजन निषिद्ध है। खास यह कि जहां ग्रहण दृश्यमान होता है, उसका प्रभाव भी वहां ही होता है। इस नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए स्नान-दान व जप-तप का महत्व शास्त्रों में बताया गया है।

वैज्ञानिक पहलू

पृथ्वी व सूर्य के बीच जब चंद्रमा आ जाता है तो उस समय सूर्यग्रहण होता

आइआइटी बीएचयू के खगोल विज्ञानी डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव के अनुसार पृथ्वी व सूर्य के बीच जब चंद्रमा आ जाता है तो उस समय सूर्यग्रहण होता है। इस परिस्थिति में सूर्य पूरी तरह से ढक जाते हैं।

कोरोना मंडल से निकलने वाली किरणों की तीव्रता को नंगी आखों से देखना नुकसान हो सकता है

बाहर की ओर एक रिंगनुमा आकृति बन जाती है जिसे कोरोना मंडल कहा जाता है। इस मंडल से निकलने वाली किरणों की तीव्रता अधिक होती है। इसे नंगी आखों से देखना नुकसानदायक हो सकता है। इससे बचने के लिए चश्मा लगाना जरूरी होता है। कोरोना मंडल में तापमान अधिक होने से हमारे वाह्य वातावरण पर भी प्रभाव पड़ता है।

साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण कब होगा?

अगला सूर्य ग्रहण भारत में 21 जून, 2020 को दिखाई देगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। वलयाकार अवस्था का संकीर्ण पथ उत्तरी भारत से होकर गुजरेगा। देश के शेष भाग में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई पड़ेगा।

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