6 दिसंबर भूलकर सतरंगी सपने बुन रही अयोध्या

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मंदिरों से घंटे-घड़ियाल के साथ आरती की धुन गूंज रही थी तो, मस्जिदों से अजान की आवाज। इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर पर आए फैसले के 27वें दिन अयोध्या का 27 साल पुराना दर्द मिटता सा नजर आया।

इस सुखद संयोग को हिंदू हो या मुसलमान बयां करते नहीं थक रहा। मुस्लिम पक्ष ने बृहस्पतिवार को तड़के अजान के साथ निर्णय लिया कि यौम ए गम मनाने से तौबा करेंगे जबकि, हिंदू पक्ष पहले ही शौर्य दिवस मनाने से इन्कार कर चुका था।

ढांचा ध्वंस की 28वीं बरसी के एक दिन पहले ही लोग अतीत को भुला देना चाहते हैं। युवा ही नहीं बुजुर्ग व नौनिहाल भी विकास के नित नए सतरंगी सपने बुन रहे हैं। वे कहते हैं कि आजकल गूगल बाबा से सिर्फ कैसा अयोध्या के विकास का मॉडल होगा, कैसा भव्य व दिव्य राममंदिर बनेगा, सद्भाव के लिए कहां मस्जिद बननी चाहिए जैसे सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

अब सभी लोग भरोसे के साथ संकल्पबद्ध होकर तरक्की के लिए सरकार की ओर निहार रहे हैं। बदले परिदृश्य का असर मठ-मंदिरों, गली-मोहल्लों और स्कूल-कॉलेजों से लेकर कारोबार तक में दिखा।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय कटरा में सुबह स्कूल में झाड़ू लग रहा था, तमाम सुरक्षा और हाई अलर्ट के दावे यहां बेअसर थे। सुतहटी मोहल्ले से स्कूल पहुंच रही कक्षा छह की छात्रा आसमीन, उमरा व रेशमा एक साथ कहतीं हैं कि कैसा छह दिसंबर…।

न किसी ने बताया है न कोई रोक-टोक है। इनके साथ पास के मझुआना, कटरा मोहल्लों के पढ़ने वाले मासूम भी नजर आते हैं, मंदीप, श्रेया, प्रीती, सौरभ, गीता, प्रतिमा, अंशिका सब एक साथ बोल पड़ते हैं कि स्कूल तो खुलेगा और हम सब आएंगे पढ़ने।

अधिग्रहीत परिसर के पीछे आलमगंज कटरा में मौलवी मोहम्मद मिलते ही बोल पड़े, छह दिसंबर को लेकर फिर आए हैं न आप…। देखिए अब न काला झंडा लगेगा न कोई गम मनेगा।

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