Katni : गांजा की खेप के साथ GRP आरक्षक की गिरफ्तारी सवालों में

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कटनी। कटनी साउथ स्टेशन में सोमवार व मंगलवार की देररात शहडोल जीआरपी थाने में पदस्थ आरक्षक की गांजा की खेप के साथ गिरफ्तारी सवालों में घिर गई है। शहडोल जीआरपी थाना प्रभारी ललिता प्रसाद कश्यप ने जीआरपी कटनी की कार्रवाई को संदिग्ध बताया है रेल पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की बिंदुवार जांच की मांग की है। गौरतलब है कि शहडोल जीआरपी थाने में पदस्थ आरक्षक दिगपाल सिंह को कटनी जीआरपी की टीम ने कटनी साउथ स्टेशन में प्रतिबंधित गांजा की 43 किलो 500 ग्राम की खेप के साथ गिरफ्तार किया था। आरक्षक के पास से जप्त गांजा की कीमत साढ़े चार लाख रूपए बताई गई और कार्रवाई के बाद जीआरपी कटनी के प्रभारी डी.पी.चड़ार ने मीडिया को बताया कि आरक्षक दिगपाल सिंह लंबे समय से गांजा तस्करों के साथ मिलकर इसकी तस्करी कर रहा था और मुखबिरों की सूचना पर उसे सोमवार व मंगलवार की दरम्यानीरात कटनी साउथ स्टेशन पर पुरी-बलसाड ट्रेन के जाने के बाद गिरफ्तार किया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मीडिया के सामने आरोपी आरक्षक दिगपाल सिंह ने अपने आपको निर्दोष बताया और उसने कटनी जीआरपी पर 3 लाख रूपए की सौदेबाजी का भी आरोप लगाया। उधर इस पूरे मामले को लेकर शहडोल जीआरपी प्रभारी ललिता प्रसाद कश्यप ने भी अपने आरक्षक का बचाव करते हुए कटनी जीआरपी की कार्रवाई को सवालों में लाकर खड़ा कर दिया है। श्री कश्यप का कहना है कि सोमवार व मंगलवार की रात आरक्षक दिगपाल सिंह की प्लेटफार्म में डयूटी थी तथा पुरी-बलसाड ट्रेन के शहडोल पहुंचने पर उसे ट्रेन के अंदर गांजा की बड़ी खेप होने की जानकारी मिली तो वह शयनयान बोगियों में यात्रियों के सामान की जांच करने लगा। इस दौरान उसे एक शयनयान बोगी में उसे कुछ बैग संदिग्ध अवस्था में रखे मिले तो उसने यात्रियों से बैगों के बारे में पूछताछ की। जब किसी यात्री ने बैगों को अपना नहीं बताया तो आरक्षक ने इसकी सूचना रात में ही उनको दी और उनके कहने पर ही वह लावारिस बैगों के साथ कटनी साउथ स्टेशन तक पहुंच गया। कटनी साउथ स्टेशन से आरक्षक गान्जा की खेप के साथ दूसरी ट्रेन से वापस शहडोल पहुचता इसके पूर्व ही जीआरपी कटनी की टीम ने आरक्षक को ही गान्जा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
रात में जंजीर खींचकर कार्रवाई करना नहीं था उचित
शहडोल से कटनी तक क्यो आया आरक्षक बीच में जंजीर खींच कर उमरिया, चंदिया में भी गाजा लेकर उतर सकता था। इय सवाल के जबाब में शहडोल जीआरपी प्रभारी ललिता प्रसाद कश्यप का कहना है कि चूंकि ट्रेन देररात की है तथा शहडोल के बाद उसका स्तपेज सीधे कटनी साऊथ है। इसके अलावा जंजीर खीचने पर ट्रेन काफी दूर जाकर रुकती है और रात के समय ऐसा करना मतलब बेवजह ट्रेन को विलंब करने के साथ ही यात्रियों को भी परेशानी में डालना जैसा था। इसलिए आरक्षक उनके कहने पर ही साऊथ स्टेशन तक पहुंचा। श्री कश्यप का यह भी कहना है कि उन्हे यह भी नहीं पता था कि जीआरपी कटनी का स्टाफ बिना मामले की जांच पड़ताल किए आरक्षक को ही आरोपी बना देगा।
आरक्षक ने किसी को नहीं दी सूचना ः एसआरपी
उधर इस पूरे मामले को लेकर रेल पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार जैन का कहना है कि आरक्षक दिगपाल सिंह ने ट्रेन के अंदर गांजा मिलने के बाद इसकी सूचना न तो वरिष्ठ अधिकारियों को दी और न ही कंट्रोल रूम को सूचित किया। जिससे यह साफ होता है कि वह खुद प्रतिबंधित गांजा की तस्करी में लिप्त था। इसके बावजूद पूरे मामले की गंभीरता से विवेचना की जा रही है और आरक्षक दिगपाल सिंह के मोबाइल की काल डिटेल खंगाली जा रही है। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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