Katni : करोड़ों खर्च होने के बाद भी सफाई में शहर फिसड्डी

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कटनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के तहत जहां पूरे देश में साफ-सफाई का दौर चल रहा है और इसी अभियान के तहत अधिकारी व जनप्रतिनधियों सहित सभी विभागों के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले शहर की सड़कों पर झाडू लगाकर कचरे हटाए व नालियां साफ कर जागरूकता दिखाई तो, वहीं नगर निगम प्रशासन द्वारा इस अभियान को सफल बनाने के लिए दिखावा ही किया रहा है।
नगर निगम द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर पिछले कुछ दिनों से चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान ढकोसला साबित हो रहा है। मुख्य मार्गों और चौराहों में सफाई करवाकर अंदरूनी मार्गों और गलियों के साथ ही शहर से लगे वार्डों की सफाई की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नगर निगम आयुक्त आर पी सिंह खुद सुबह अपनी गाड़ी से शहर की सड़कों पर सफाई व्यवस्था का अवलोकन कर रहे हैं, लेकिन उनका यह अभियान मुख्य मार्गों और चौराहों तक ही सीमित है। शहर के अंदरूनी मार्गों और भट्ठा मोहल्ला और झर्रा टिकुरिया जैसे इलाकों में वे आज तक नहीं पहुंचे। यहां की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे है।

शहर में बाहर चमक, अंदर बदहाली
यूं तो नगर निगम प्रशासन शहर की फिजा बदलने व विकास के राग अलापने की कवायद में हमेशा ही जुटा रहता है और स्वच्छ भारत अभियान के दौरान भी सफाई कर्मियों को साफ-सफाई में कोई कसर न छोड़ने की बात कही गई थी लेकिन नगर निगम प्रशासन के दिशा निर्देश पूरी तरह खोखले ही साबित हो रहे हैं, जबकि नगर के ही कई वार्ड बदहाली का दंश झेल रहे हैं। भले ही शहर के मुख्य मार्गों में साफ-सफाई व बाहरी चमक धमक का मुखौटा पहना दिया गया हो लेकिन अंदर की कुछ और बाहर कुछ और की तर्ज पर नगर के कई वार्डों में बदहाली से साक्षात्कार हो रहे हैं। नहीं हटाए जा रहे कचरों के ढेर
नगर के भीतरी हिस्सों की हालत देखने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान ही लग कर रह जाते हैं। देखने में यह आ रहा है कि शहर के विभिन्न वार्डों में गंदगी के अंबार लगे हैं, जहां की साफ-सफाई कराने की आवश्यकता भी महसूस नहीं की जा रही। शहर के मध्य में ही कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां जगह-जगह कचरों के ढेर लगे रहते हैं, जिन्हें वहां से हटवाने की जहमत नगर निगम प्रशासन के जिम्मेदारों द्वारा नहीं उठाई जा रही।

नालियों की नहीं सफाई
गंदगी से पटी पड़ी नालियां बजबजाती हुई सड़ांध मार रही हैं, जिनकी सफाई कराना भी आवश्यक नहीं समझा जा रहा। मच्छरों का प्रकोप लगातार बना हुआ है। फागिंग मशीन से धुआं करने की बात कही जा रही है लेकिन अभी तक न तो फागिंग मशीन दिखी है और न ही मच्छरों का प्रकोप कम हुआ है। गंदगी से सराबोर वार्डों में मच्छरों के पनपने के साथ ही बीमारियां जन्म ले रही हैं और लोग परेशान हो रहे हैं। भले ही प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत चेतना जागृत करने का प्रयास किया जा रहा हो लेकिन अपनी ढुलमुल कार्यशैली में मशगूल नगर निगम प्रशासन की चेतना जागृत होने के आसार कहीं से नजर नहीं आ रहे हैं।

सुअरों का रहता है डेरा
जहां एक ओर गंदगी का आलम होने के कारण संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है तो वहीं स्वाईन फ्लू जैसी खतरनाक बीमारी के जनक कहे जाने वाले सुअरों का आतंक भी रही सही कसर पूरी कर देता है। गंदगी के कारण आवारा सुअरों की जमात वार्डों में धमाचौकड़ी मचाती रहती है, जिसके कारण लोगो को समस्याओं का सामना तो करना ही पड़ता है, इसके अलावा संक्रमित बीमारियों के फैलने की संभावना से लोगों में दहशत भी रहती है। भट्ठा मोहल्ला, झर्रा टिकुरिया, तिलक राष्ट्रीय स्कूल के पास सहित अन्य क्षेत्रों में सुअरों को आसानी से विचरण करते हुए देखा जा सकता है।

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