देश की 41 बिजली कंपनियों में सबसे खराब सप्लाई “मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र की”, मिला 37 वां नंबर

जबलपुर । केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय से जारी रिपोर्ट के आधार पर देश की 41 बिजली वितरण कंपनियों में बिजली सप्लाई के मामले में मप्र की बिजली कंपनी सबसे आखिरी पायदान पर हैं। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का 37 वां स्थान है तथा मध्य क्षेत्र कंपनी को 34वें नंबर पर रखा गया है। वहीं पश्चिम क्षेत्र कंपनी टॉप 10 में शामिल तो नहीं हुई लेकिन 14 नंबर पर आकर, दोनों कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस रिपोर्ट के बाद प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों के गुणवत्ता से जुड़े दावों की पोल खुल गई है। चिंता की बात ये है कि पिछले साल की रैंक में सुधार होने की बजाए ग्रेड और नीचे गिरा है।

दरअसल केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने देश की 41 प्रमुख वितरण कंपनियों की गुणवत्ता के आधार पर रैंक तय की है। सिर्फ इंदौर-उज्जैन संभाग की पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को ए ग्रेड मिला है। इस कंपनी को 14वें नंबर पर रखा गया है। देश में अव्वल नंबर पर गुजरात की बिजली कंपनी है। इसके अलावा भोपाल-ग्वालियर संभाग के मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को सी प्लस ग्रेड देकर 34वें नंबर पर रखा है। वहीं जबलपुर-रीवा-सागर-शहडोल संभाग की पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण को सी डबल प्लस ग्रेड के साथ 37वें नंबर पर रखा गया है। ऊर्जा विभाग ने 2017-18 की 7वीं रेटिंग जारी की है।

मायने

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी- ए ग्रेड मिला है। यानि वित्तीय स्थिति और इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी- सी डबल प्लस ग्रेड है। वित्तीय स्थिति खराब, खर्च ज्यादा। लाइन लॉस पर नियंत्रण नहीं। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी- सी डबल प्लस ग्रेड है। वित्तीय स्थिति खराब, खर्च ज्यादा। लाइन लॉस पर नियंत्रण नहीं।

अहम वजह

कलेक्शन- कमजोर कलेक्शन अहम है। बिजली कंपनी का रेवेन्यु लगातार कम हो रहा है। एरियर्स बढ़ा है। जिसके कारण वित्तीय स्थिति खराब हुई है।

बिलिंग नहीं- बिजली कंपनी की बिजली खपत होने के बावजूद वसूली नहीं हो पा रही है। इसकी बड़ी वजह शत प्रतिशत बिलिंग नहीं होना है। जिस वजह से घाटा बढ़ा है।

मेंटेनेंस खर्च अधिक- बिजली कंपनी की आय से ज्यादा कर्मचारी और मेंटेनेंस पर खर्च हो रहा है। तीन कंपनी होने से हर किसी का वित्तीय भार अधिक है।

लाइन लॉस- बिजली कंपनी का लाइन लॉस लगातार घटने की बजाए बढ़ रह है। अभी 30 फीसदी के आसपास लाइन लॉस पहुंच चुका है जबकि बीते सालों में लाइन लॉस 24 से 27 फीसद रहा।