पार्षदों द्वारा महापौर निर्वाचन अध्यादेश ‘होल्ड’ पर राज्यपाल से मिले कमलनाथ

Advertisements

भोपाल। महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव जनता के बजाय वार्ड पार्षदों से कराने संबंधी अध्यादेश राज्यपाल लालजी टंडन ने ‘होल्ड” कर दिया है। देर शाम मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल के सामने सरकार का रुख स्पष्ट किया। ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले का पटाक्षेप जल्दी हो जाएगा।

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजभवन से कोई मतभेद नहीं है। प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक हलकों में दिन भर इस मुद्दे को लेकर सरगर्मी बनी रही। सभी की निगाहें राज्यपाल के निर्णय पर लगी हैं।

Madhya Pradesh में वर्दीधारी पदों के लिए 28 साल ही रहेगी आयु सीमा पर मूल निवासी का प्रावधान हटेगा
यह भी पढ़ें

गौरतलब है कि अध्यादेश पर सोमवार को निर्णय होना था, लेकिन राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा का ट्वीट आने के बाद मामले में ‘टि्वस्ट” आ गया और राज्यपाल के नाखुश होने की खबरें सामने आने लगीं। शाम को अचानक मुख्यमंत्री कमलनाथ के राजभवन पहुंचने की खबर आई, जहां उन्होंने लगभग एक घंटे तक रुककर राज्यपाल के सामने सरकार का पक्ष रखा।

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि विवाद की कोई स्थिति नहीं हैं, उन्होंने राज्यहित में निर्णय का भरोसा जताया। उन्होंने तन्खा के ट्वीट को उनकी निजी राय बताया। उल्लेखनीय है कि तन्खा ने अपने ट्वीट के जरिए राजधर्म की नसीहत और अध्यादेश न रोकने की सलाह दी थी। इसके बाद राज्यपाल के नाखुश होने की खबर सामने आई, बताया जाता है कि राजभवन ने इसे दबाव की राजनीति माना। जबकि पूर्व में वह सरकार के साथ हुई चर्चा में आश्वस्त थे।

जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने रात में पत्रकारों को मुख्यमंत्री की राज्यपाल के साथ हुई मुलाकात का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को नगरीय निकाय में महापौर के संबंध में विस्तृत जानकारी देकर अध्यादेश के बारे में सरकार का पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि राज्यपाल इस संबंध में राज्यहित में निर्णय लेंगे। शर्मा ने भाजपा द्वारा पार्षदों के खरीद-फरोख्त के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि खरीद-फरोख्त कांग्रेस का चरित्र नहीं है। अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव नई बात नहीं है, अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था है।

जनादेश के अपहरण की कोशिश न करें: शिवराज

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में राज्यपाल से मुलाकात कर अध्यादेश का विरोध किया। उन्होंने बताया कि मैंने राज्यपाल से मांग की है कि त्रिस्तरीय पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष हो। राज्यपाल राजधर्म का पालन कर रहे हैं, वह अनुभव की भट्टी से पके हुए हैं। कांग्रेस उन्हें सीख न दे। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ‘कांग्रेस जनादेश के अपहरण की कोशिश न करे। सामान्य नागरिक के नाते भी मैं मुख्यमंत्री से कहूंगा कि वे खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने वाला कदम न उठाएं, मेरी मांग है कि जिला व जनपद पंचायत के चुनाव भी सीधे कराएं।”

राज्यपाल सरकार को सहयोग करें: सिंघार

वनमंत्री उमंग सिंघार ने अपने ट्वीट में कहा कि महापौर चुनाव को लेकर चल रहा गतिरोध उचित नहीं है। राज्यपाल को पूर्वाग्रह से हटकर सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए, यही संवैधानिक व्यवस्था है।

तीन विकल्प हैं राज्यपाल के पास

हरियाणा व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने इस मुद्दे पर कहा है कि राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं। कोई बिल आता है तो उस पर कारण गिनाते हुए स्पष्टीकरण पूछ सकते हैं। राज्यपाल संतुष्ट नहीं तो वह अध्यादेश को अनिश्चित काल के लिए पेंडिंग रख सकते हैं अथवा सीधे राष्ट्रपति को भेजकर मार्गदर्शन मांग सकते हैं। पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने महापौर का चुनाव सीधे जनता से होने को ज्यादा प्रजातांत्रिक बताया है।

राज्यपाल से कोई विवाद नहीं

राज्यपाल से मुलाकात के बाद में मुख्यमंत्री मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि सरकार का राज्यपाल से कोई विवाद नहीं। राज्यपाल की नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं पहले भी नहीं आई आगे भी नहीं आएगी। राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने जो बयान दिया वह उनका निजी विचार है सरकार की राय नहीं। उन्होंने बताया कि मैंने राज्यपाल को दिल्ली यात्रा का ब्योरा दिया। बाढ़ के बारे में चर्चा हुई। 13 हजार करोड़ की आवश्यकता है, केंद्र सरकार से अधिक से अधिक पैसा मांगा गया है।

Advertisements