गोलबाजार में धू-धूकर जली रावण की सोने की लंका

कटनी। अशोक वाटिका में मां सीता को राम की मुद्रिका देते हुए हनुमान संदेश देते हैं कि जल्द ही भगवान लंका पर विजय पाने वाले हैं। वाटिका को उजाड़ कर जम्बूमाली और अक्षय कुमार सहित कई राक्षसों का वध करने के बाद मेघनाथ के नागपाश का मान रखते हनुमान जी उसमें बंध जाते हैं और रावण के दरबार में पहुंचते हैं जहां विभिषण के हस्तक्षेप के बाद उन्हें पूंछ में आग लगाने की सजा दी जाती है, लेकिन रावण का यह कदम पूरी लंका पर भारी पड़ता है। सोने की लंका चंद समय में आग के गोले में तब्दील हो जाती है। गोलबाजार रामलीला में भारी जन समूह के बीच लंका दहन का यह प्रसंग देर रात तक लोगों खास तौर पर बच्चों के लिए कौतुहल देता रहा। पं .सुनील तिवारी, पं. प्रदीप तिवारी तथा ब्यास जी रोहणी शुक्ला की बेहतरीन चौपाईयों के गायन में रामलीला शनैः शनैः संपन्नता की ओर बढ़ रही है। भगवान श्री राम लंका आक्रमण करने की तैयारी में है। समिति के सचिव भरत अग्रवाल, उपाध्यक्ष रवि खरे, टिल्लू सिंघानियां, ललित गुप्ता, राजेन्द्र सोधिया, संतोष जायसवाल, अभय बगाड़िया, शरद अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला, गिरधारी शर्मा, संजय गिरी, रणवीर कर्ण, वेंकटेश मिश्रा, अभाविप के जिला संयोजक अजय माली, सिप्तैन रजा, अनुनय शुक्ला, अनुज मिश्रा, पुलकित राजोरिया, विशाल कोल, अनुराग गोंटिया, सचिन मिश्रा, अनुभव शुक्ला, रोहित सेन, अंतिम गुप्ता आदि उपस्थित थे। आज नवमीं पर लक्षमण शक्ति की लीला का मंचन होगा।

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