अल-क़ायदा दे रहा भारतीय डॉक्टरर्स को हिदायतें, जिहादी तैयार करने बांट रहा है हिन्दी, तमिल और बांग्ला सामग्री

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आतंकवादी संगठन अल-क़ायदा इंटरनेट की मदद से भारत में अपना जाल फैलाना चाहता है। इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के अनुसार अल-क़ायदा इंटरनेट पर जिहादी सामग्री का तमिलवजर्न , बांग्ला और हिन्दी अनुवाद उपलब्ध करा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस के पास अल-कायदा द्वारा दी जा रही इस सामग्री की कुछ कॉपियां हैं। जिसमें अल-रिसाला और इंस्पायर जैसी कई जिहादी पत्रिकाओं के अनुवाद शामिल हैं। अल-क़ायदा दक्षिण, पश्चिम, पूर्वी भारत पर विशेष ध्यान दे रहा है। साल 2005 से सक्रिय हुए आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन की गतिविधियों से भी अल-क़ायदा के इस मंसूबे का पता चलता है। पिछले कुछ सालों में भारत के शहरी इलाकों में इस संगठन ने कई हमले किए हैं।
अल-क़ायदा द्वारा बांटी जा रही सामग्री को देखकर लगता है कि वो पढ़े लिखे लोगों को खास तौर पर निशाना बना रहा है। तमिल में अनुवादित एक लेख अल-रिसाला के तीसरे अंक से लिया गया है जिसमें डॉक्टर्स और इंजिनीयर्स के अलावा सापफ्टवेयर इंजीनियर्स के साथ साथ साइंटिस्ट को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। लेख में लिखा है, डॉक्टर, मैं तुमसे पूछता हूँ कि क्या अलप्पो में हुए बम धमाके में घायल बच्चे का इलाज करना अपने देश में इस्लाम से नफरत करने वाले को दवा करने से बेहतर नहीं है। लेख में आगे कहा गया है, हम बहाना बनाते हैं कि अल्लाह के दुश्मन हमें देख रहे हैं और हमारा पासपोर्ट जब्त कर लिया जाएगा। क्या हमें अल्लाह में यकीन नहीं रहा? क्या पैगंबर मोहम्मद काफिरों की निगाह के नीचे से मक्का से मदीना हिजरत नहीं कर गये थे। अल-रिसाला के ही एक अन्य लेख के तमिल अनुवाद में एक ऐसे बूढ़े की कहानी बतायी गयी है जो एक आँख होने के बावजूद लड़ाई में शामिल हुआ। इस तरह के कई प्रकरण मौजूद है। जिसमें आतंकवादी संगठन ने एज्यूकेटेड लोगों को अपनापन दिखाकर धर्मभेद सिद्व करने में जुटा हुआ है

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