17 हजार पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

भोपाल। राजधानी सहित प्रदेशभर के करीब 17 हजार पटवारियों ने गुरुवार को अपने-अपने बस्ते तहसील व नजूल कार्यालयों में जमा कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। यह हड़ताल मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बयान से आहत होकर की जा रही है।

इधर, पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से प्रदेशभर में राजस्व ही नहीं, बल्कि 48 विभागों के जरूरी काम ठप पड़ गए हैं। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर किसानों की बर्बाद हुई फसलों के सर्वे पर पड़ेगा।

वहीं, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, नजूल एनओसी जारी करने के लिए मौका मुआयना रिपोर्ट, पंचनामा, बर्बाद हुई फसलों का सर्वे, बाढ़ राहत, जाति प्रमाण पत्र, लॉ एंड आर्डर में अधिकारियों के साथ ड्यूटी, बीपीएल राशनकार्ड सहित अन्य राजस्व प्रभावित हुए।

इतना ही नहीं भोपाल में हॉस्टलों, कोचिंग सेंटरों की जांच, अतिक्रमण की जांच करना, खसरों व नक्शों को अपडेट कराना आदि कार्य भी नहीं हुए। मप्र पटवारी संघ की भोपाल जिला इकाई के अध्यक्ष हेमंत घोष ने बताया कि जिले के सभी पटवारियों ने अपने-अपने बस्ते जमा कर दिए हैं और हड़ताल पर चले गए हैं। शुक्रवार सुबह से सभी जिलों में प्रशासन से अनुमति लेकर धरना-प्रदर्शन भी शुरू हो जाएंगे।

– जब तक नेता माफी नहीं मांगेंगे तब तक जारी रहेगी हड़ताल

पटवारियों का कहना है कि अब यह हड़ताल तभी समाप्त होगी जब पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और खेल मंत्री जीतू पटवारी अपने बयान को लेकर पटवारियों से माफी मांगेंगे। हालांकि, मप्र पटवारी संघ के प्रदेश महामंत्री धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि हड़ताल पर जाने से पहले सभी पटवारियों ने अपनी तरफ से किसानों की फसलों का सर्वे पूरा करने के साथ-साथ उसकी फाइनल रिपोर्ट भी तैयार करा दी है।

उन्होंने बताया कि गुरुवार दोपहर में राजस्व विभाग के आला अधिकरियों द्वारा संघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल को चर्चा के लिए बुलाने की बात सामने आई थी। आधिकारिक बुलावा न होने के चलते संघ का कोई भी पदाधिकारी चर्चा के लिए नहीं गया।

मंत्री को दिया गया समय खत्म, अब सीधे मुख्यमंत्री से बात होगी

पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि खेल मंत्री जीतू पटवारी को प्रदेश के पटवारियों को लेकर दिए गए रिश्वतखोरी वाले बयान पर माफी मांगने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था। वह खत्म हो गया है। अब इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री कमलनाथ से ही चर्चा होगी। इसके इतर किसी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

यह है मामला

एक सप्ताह पहले प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने इंदौर में कलेक्टर लोकेश जाटव की मौजूदगी में पटवारियों को 100 फीसदी रिश्वतखोर बताते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस मामले ने तूल पकड़ा और उसके बाद प्रदेशभर में पटवारियों ने मंत्री जीतू पटवारी के इस बयान का विरोध करते हुए जगह-जगह रैली निकालकर ज्ञापन सौंपे थे। उस समय पटवारियों ने मंत्री से माफी मांगने की मांग उठाई थी।

यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से कहा कि पटवारी और गिरदावर लाखों की रिश्वत लेकर जमीन का नामांतरण करते हैं। ये रिश्वतखोरी भाजपा सरकार के दौर में शुरू हुई थी। इसे खत्म करने की जरूरत है। दोनों नेताओं के बयान के बाद बुधवार शाम को पटवारी संघ ने अपनी प्रदेश कार्यसमिति और सभी जिलाध्यक्षों ने चर्चा कर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया था।

मंत्री भोपाल में करेंगे पटवारी संघ से मुलाकात

पटवारियों की प्रदेश-व्यापी हड़ताल की जानकारी लगने के बाद प्रदेश के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पटवारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है। उन्होंने गुरुवार को सागर में कहा कि प्रदेश में अतिवृष्टि के कारण सर्वे की गंभीरता को देखते हुए पटवारियों को इस समय हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए था।

उन्होंने पटवारियों से काम पर लौटने की अपील भी की। राजस्व मंत्री शुक्रवार को भोपाल पहुंचेंगे और वहां पटवारी संघ के प्रतिनिधियों से हड़ताल वापस लेने चर्चा करेंगे। हालांकि, राजस्व मंत्री ने अपने साथी मंत्री जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए उन बयानों की जानकारी न होने की बात कही, जिनके कारण पटवारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है।

हमारा अपमान हो रहा

हमारा लगातार अपमान हो रहा है। पहले मंत्री जीतू पटवारी और उसके बाद पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पटवारियों को खुलेआम रिश्वतखोर कहा। हम तभी हड़ताल वापस लेंगे जब दोनों नेता माफी मांगंगे।

-धर्मेंद्र शर्मा, महामंत्री, मप्र पटवारी संघ

पटवारी संघ से चर्चा करूंगा

यह राजस्व विभाग के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय है। जनहित के लिए पटवारियों को हड़ताल नहीं करना चाहिए। हड़ताल वापस लेने के लिए शुक्रवार को भोपाल में पटवारी संघ से चर्चा करूंगा।

– गोविंद सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री, मप्र